रॉयल पवेलियन एंड म्यूजियम ब्रिटेन की क्रिएटिव प्रोग्राम क्यूरेटर जोडी ईस्ट प्रथम विश्वयुद्ध में भारतीय सैनिकों के योगदान और शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देश के अलग-अलग प्रदेशों में घूमकर सैनिकों या उनके परिजनों से संपर्क कर रही हैं।
इसके जरिए यह जानने की कोशिश की जा रही है कि युद्ध के दौरान अस्पतालों में भर्ती फौजी या अन्य फौजी या उनके परिजनों का क्या हाल था और जो शहीद हो गए, उनके परिजनों ने आखिरकार किस तरह इतने वर्ष गुजारे। जोडी ईस्ट ने ‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में इस विषय पर किए जा रहे शोध के बारे में जानकारियां दीं।
जोडी ईस्ट ने कहा कि वर्ष 1914 में शुरू हुए प्रथम विश्वयुद्ध से संबंधित सैनिकों और उनके परिजनों के पास बचे दस्तावेज व संबंधित उपकरणों की ब्रिटेन में प्रदर्शनी लगाई जाएगी।
साथ ही म्यूजियम में पहुंचने वालों को महायुद्ध के दौरान की यादें दोबारा ताजा करने के लिए ऑडियो भी तैयार किए जाएंगे।
दिल्ली, गुड़गांव के बाद भारत के कुछ और शहरों में भी प्रथम विश्वयुद्ध से जुड़ी जानकारियां हासिल करने में जुटी जोडी ने कहा कि इतिहास हमेशा जीवंत होता है। इससे मौजूदा युवा पीढ़ी को इतिहास जानने का मौका मिलता है।
पंचकूला के एक होटल में रुकी जोडी ने भारतीय कला, संस्कृति और लोगों की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी कोशिश है कि पहले विश्वयुद्ध में शामिल भारतीयों की उपलब्धियों को रायल पवेलियन तक पहुंचाया जाए, ताकि पूरी दुनिया के लोगों को इतिहास के पन्नों को नए सिरे से देखने का मौका मिल सके।