कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद लोग आटे के साथ दाल की उम्मीद कर रहे थे। कांग्रेस ने उससे एक कदम आगे बढ़ कर आटा-दाल के साथ चाय की पत्ती और चीनी देने का भी वादा कर दिया। इसके लिए बजट में प्रावधान भी कर दिया गया, लेकिन चाय की पत्ती और चीनी तो दूर की बात है, लोगों को दाल तक नहीं मिली।
नई सरकार के कार्यकाल में फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत राशन वितरण शुरू हो गया है, लेकिन इसे देख कर लोगों की सारी उम्मीदें टूट गई हैं। दो रुपये प्रति किलो के हिसाब से एक व्यक्ति को पांच किलो गेहूं दिया जाता है। लोगों को छह माह के लिए तीस किलो गेहूं का बैग दिया जा रहा है। पंजाब में फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत करीब 33 लाख परिवारों को सस्ता राशन मुहैया करवाया जाता है।
केंद्र सरकार इस एक्ट के तहत सिर्फ दो रुपये प्रति किलो के हिसाब से गेहूं देती है। लेकिन पिछली अकाली-भाजपा सरकार ने अपनी ओर से लाभपात्रियों को पहले बीस रुपये प्रति किलो दाल देने का एलान किया था। बाद में दाल के रेट आसमान पहुंच गए तो सरकार ने तीस रुपये प्रति किलो में दाल देने का आश्वासन दिया। अब लोगों को दाल मिले हुए करीब चार साल हो गए हैं। चुनाव से पहले 2016 में कुछ मात्रा में तीस रुपये प्रति किलो वाली दाल भेजी गई, लेकिन वह चुनिंदा परिवारों को ही मिल सकी।
कांग्रेस ने मेनिफेस्टो में दाल जारी रखने के साथ-साथ चाय की पत्ती और चीनी देने का वादा किया था। बजट में आटा, दाल, चाय की पत्ती और चीनी स्कीम को नए सिरे से शुरू करने को पांच सौ करोड़ का प्रावधान किया गया, लेकिन अब तक फूड सप्लाई विभाग को फंड नहीं मिले हैं।