पंजाब के सरकारी विभागों में कार्यरत 36000 आउटसोर्स, डेलीवेज और कांट्रैक्ट मुलाजिमों को नौकरी में पक्का करने के लिए गठित कैबिनेट सब कमेटी सोमवार को अपनी पहली बैठक में कोई फैसला नहीं ले सकी। इस पर कानूनी पेंच फंस गया है। अब इस कमेटी की दूसरी बैठक 14 जुलाई को होगी।
कैबिनेट सब कमेटी की बैठक वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की अध्यक्षता में हुई, जिसमें कमेटी में बतौर सदस्य कैबिनेट मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर और हरजोत सिंह बैंस भी शामिल थे। जानकारी के अनुसार, बैठक में उन कानूनी पेचों पर मंथन हुआ, जिनके चलते कच्चे मुलाजिमों को पक्का करने के फैसले को अदालत में चुनौती मिल सकती है।
सब कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से कच्चे मुलाजिमों को पक्का करने से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर अब तक जो फैसले और व्यवस्था दी है, उन पर भी विचार विमर्श किया गया। सब कमेटी ने अब कच्चे मुलाजिमों से संबंधित सरकारी रिकॉर्ड मंगाया है, जिस पर अगली बैठक में विचार किया जाएगा।
सोमवार की बैठक में सब कमेटी का जोर इस बात पर रह कि मुलाजिमों को पक्का किए जाने के सरकार का यह फैसला कानूनी मुश्किल में न फंसे।सोमवार की बैठक में यह विचार भी रखा गया कि मुलाजिमों को एक साथ पक्का करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से पक्का किया जाए, जिससे संभावित कानूनी अड़चनों का भी पता चल सकेगा। इस स्थिति में पहले उन मुलाजिमों को पक्का किया जाए, जिन्हें सरकार की ओर से विज्ञापन के जरिये नियमों के अनुसार भर्ती किया गया है। इसके अलावा सब कमेटी ने पूरे मसले पर कानूनी राय लेने का भी फैसला किया है।