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चंडीगढ़ में भीषण अग्निकांड, 4 मंजिला बिल्डिंग ढही

Mon, 09 Jun 2014 05:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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अभी तक आग लगने का कारण शार्ट सर्किट माना जा रहा है। बिल्डिंग के अंदर लकड़ी और थर्माकोल का काफी इस्तेमाल हो रखा था। यहां लकड़ी के कैबिन बने हुए थे जिस कारण आग भड़कती रही।
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आग लगने के कारण सेक्टर-17 की बिजली भी काटनी पड़ी जो देर रात तक नहीं आई। सूचना पर आधा दर्जन से ज्यादा फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आग बुझाने के लिए पहुंचीं। हाइड्रोलिक मशीन भी एक घंटे बाद मौके पर पहुंच गई। सूचना मिलने पर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर एवं प्रभारी वीके जैन और उनका स्टाफ भी पहुंचा जो देर रात तक मौके पर मौजूद रहा।

संस्थान के बेसमेंट में एसी का प्लांट है। घटना के समय कर्मचारी प्लांट की रिपेयर कर रहे थे। संस्थान के अधिकारियों के अनुसार, प्लांट की मरम्मत का काम ब्लू स्टार कंपनी की ओर से किया जा रहा है।
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2 फायर फायटर के शव बरामद

सेक्टर-17 स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट इलेक्ट्रानिक्स एंड इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी के धराशाई बिल्डिंग के मलबे से अब तक 2 फायर फायटर के शव बरामद हुए हैं। श्‍ाव की पहचान कर ली गई है। मलबे में आधा दर्जन से अधिक फायर फायटर के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।

आईकार्ड से हुई पहचान
घटना केवक्त सबसे पहले एयरफोर्स केरविंदर कुमार की बॉडी निकाली गई। बॉडी को तुरंत सेक्टर-16 के जनरल अस्पताल से ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल के डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ.जी दिवान ने बताया कि रविंदर कुमार के गले में आईकार्ड था और उसी से उसकी पहचान हुई थी।

कुछ देर बाद ही दूसरी बॉडी भी निकाली गई जिसकी पहचान बठिंडा के अमनदीप के रूप में हुई है। अमनदीप का शव दूसरी मंजिल से मिला। वह दीवार के नीचे दब गया था और उसका एक हाथ ही शरीर से अलग हो गया था। अमनदीप निगम के दमकल विभाग में कार्यरत था।

पहले भी हो चुकी है मौत
आग लगने की घटना से पहले भी एक कर्मचारी की मौत हो चुकी है। सेक्टर-22 में करीब 4 साल जब आग लगी थी उस दौरान भी एक कर्मचारी की मौत हो गई थी।

किसी भी फायरकर्मी की इंश्योरेंस नहीं
सूत्रों की मानें तो नगर निगम के किसी भी फायरकर्मी की इंश्योरेंस नही है। पहले भी जब कर्मचारी की मौत हुई थी तो इंश्योरेंस का यह मुद्दा हाउस में भी उठा था। उसके बाद भी नगर निगम ने कोई सबक नहीं लिया।

ताले तोड़कर अंदर घुसे दमकल कर्मी, पूरी व्यवस्‍था हुई फेल

जिस समय दमकल विभाग के कर्मचारी आग बुझाने के लिए पहुंचे तो इमारत के कई दरवाजे पिछली तरफ से बंद थे। कर्मचारी दरवाजे तोड़कर अंदर घुसे। बेसमेंट तक पहुंचने के लिए ग्राउंड फ्लोर की खिड़कियां भी कर्मचारियों को तोड़नी पड़ी। आग लगने के बाद इसका धुआं मध्यमार्ग से लेकर सेक्टर-26 तक पहुंच गया। धुआं ट्रैफिक लाइटों तक पहुंच गया। इसको देखकर कई लोग आग को देखने के लिए पहुंच गए।

मलबे से खड़ी हुई मुसीबत
निगम के दमकल विभाग के अलावा इंजीनियरिंग विभाग भी आग बुझाने में जुट गया, लेकिन सब बेबस नजर आए। आग लगने से पूरी बिल्डिंग धराशायी हो गई। इंजीनियरिंग विभाग की टीम मलबा हटाने में जुटी रही। मलबे के कारण ही फायर टेंडर को आगे जाने में मुश्किलें हो रही थी। मौके पर चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद भी पहुंचे थे।

देरी से मांगी मदद
आग बढ़ने का एक ये भी बड़ा कारण रहा कि निगम ने एयरफोर्स से देरी से मदद मांगी। सूत्रों से पता चला कि निगम ने बड़ी देरी से एयरफोर्स को सूचित किया और करीब 8.30 बजे जाकर कहीं एयरफोर्स की गाड़ियां मौके पर पहुंची।

सुरक्षा चक्कर फेल
फाइर विभाग का मोटो है किल द फाइर बिफोर इट किल्स, मगर रविवार को हुए भीषण अग्निकांड के आगे विभाग बेबस नजर आया। वह तब जबकि फायर ब्रिगेड का कंट्रोलरूम भी इसी सेक्टर में है।

ऐसी गलती क्यों
फायर विभाग के अनुसार वर्ष 2009-10 में 14 फायर एंट्री सूट और 21 थ्री लेयर फायर प्रोक्सिमिटी सूट खरीदने की योजना बनाई गई थी, जबकि दो फायर फाइट सूट और 14 फायर प्रोक्सिमिटी सूट उपलब्ध हैं।

साथ की इमारत के लोगों ने किया हंगामा

आग लगने वाली इमारत के साथ कई अन्य इमारतों में निजी कार्यालय हैं। इनके संचालक भी मौके पर पहुंच गए। जब आग की लपटें उनकी इमारत तक पहुंची तो उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया।

एक संचालक की सेक्टर-17 के थाना प्रभारी दिलशेर चंदेल के साथ बहस भी हो गई। लोगों का आरोप है कि उनकी इमारतों को आग से बुझाने का प्रयास नहीं किया जा रहा है।

लोगों का कहना है कि नगर निगम करोड़ों रुपये के आधुनिक यंत्र होने का दावा करता है, लेकिन इसके बावजूद आग लगातार बढ़ती जा रही है।

आग को बुझाने वाले कर्मचारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कर्मचारी बिना मास्क लगाए ही आग बुझाने में घंटों तक लगे रहे। यहां तक कि कोई स्पेशल सूट भी नहीं पहने थे।
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शुक्र है कि रविवार को आग लगी...

मौके पर मौजूद हर कोई यही कह रहा था कि शुक्र है कि रविवार को आग लगी, क्योंकि अन्य दिनों यहां के बाहर की पेड पार्किंग फुल रहती है।

इस कारण दमकल विभाग की गाड़ी भी अंदर दाखिल नहीं हो सकती हैं। साथ ही अन्य दिनों में इस इमारत में सैकड़ों लोग होते है। दूसरे राज्यों से भी बच्चे यहां पर कंप्यूटर की शिक्षा लेने के लिए आते हैं। 
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