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बाढ़ पीड़ितों की जान बचाने वाले विमान में आग

Sun, 21 Sep 2014 10:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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एयरफोर्स के एएन-32 विमान के इंजन में शनिवार रात करीब पौने नौ बजे लैडिंग के दौरान आग लग गई। यह विमान श्रीनगर से एनडीआरएफ और बीएसएफ के जवानों को लेकर चंडीगढ़ लौट रहा था।
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चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन के रनवे पर आग की लपटों के बीच विमान करीब 600 मीटर तक दौड़ता रहा। सूचना मिलते ही हड़कंप मच गया। एयरफोर्स के क्रू मेंबर और दमकल विभाग के जवान मौके पर पहुंचे।

आखिरकार आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। आग से विमान करीब 70 प्रतिशत डैमेज हो गया है।
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टेक्निकल फॉल्‍ट के कारण लगी आग

जानकारी के मुताबिक विमान के इंजन में आग लगी थी। एयरक्राफ्ट में उस दौरान कुल 11 लोग थे। इनमें पांच क्रू मेंबर और बाकी एनडीआरएफ व बीएसएफ के जवान थे। उन्हें सुरक्षित बचा लिया गया है। हालांकि कुछ लोगों को हल्की चोटें भी आई हैं।

एयरफोर्स से जुड़े सूत्रों ने बताया कि आग के कारणों का फिलहाल पता नहीं लग पाया है। मामले की जांच की जाएगी। यदि विमान में कुछ मिनट पहले आग लगती तो बड़ा हादसा हो सकता था।

इस विमान का प्रयोग जम्मू-कश्मीर एरिया में मेंटेनेंस और सामान ले जाने के लिए किया जाता रहा है। ये विमान साल 1980 में खरीदे गए थे। इस लिहाज से ये काफी पुराने हैं।

शहर में प्लेन क्रैश की फैली अफवाह

आग लगने की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। आग बुझाने की भरपूर कोशिश की गई, लेकिन बुझने की बजाय आग बढ़ती चली गई। इस बीच एयर ट्रैफिक कंट्रोल से नगर निगम के फायर ब्रिगेड की टीम को सूचना दे दी गई।

सूचना मिलते ही निगम के फायर बिग्रेड ने अपना फायर टेंडर रवाना किया, लेकिन उससे पहले ही आग बुझा ली। इस दौरान शहर में अफवाह फैल गई कि रनवे पर एक विमान क्रैश हो गया है। इसकी सूचना मिलते ही पुलिस और अन्य विभाग भी चौकन्ने हो गए।

अस्पताल खाली कराने के जारी हुए थे निर्देश

एयर ट्रैफिक कंट्रोल से फायरब्रिगेड और पुलिस को सूचना मिलने के बाद पीजीआई, जीएमसीएच 32 और सेक्टर 16 हास्पिटल के इमरजेंसी के कुछ वार्ड खाली कराने के निर्देश जारी कर दिए गए।

सूचना मिलते ही तीनों हास्पिटल की आपातकालीन टीम अपनी तैयारी में जुट गई। इस दौरान बताया गया कि आग बुझ गई और कोई भी हताहत नहीं हुआ। उसके बाद अस्पतालों की टीम ने चैन की सांस ली।
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एएन-32 का पहला कस्टमर था भारत

सूत्रों ने बताया कि साल 1980 में खरीदे गए विमानों के पहले कस्टमर रूस और भारत थे। इसकी क्षमता करीब सात हजार किलोग्राम भार ले जाने की है। साल 2008 में इसके मेंटेनेंस के लिए एक करार भी हुआ था।

बताया जा रहा है कि मेंटेनेंस के बाद इस विमान की लाइफ करीब 15 साल और बढ़ जानी थी। इसका प्रयोग दिन और रात में किया जा सकता है। कारगिल और लेह एरिया में इसका इस्तेमाल किया गया था।
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