राई औद्योगिक क्षेत्र स्थित रीयल पेंट फैक्टरी की आग में तीन कर्मचारी जिंदा जल गए और दो लापता हैं। इस आग में 12 अन्य कर्मी भी झुलस गए, जिनमें पांच की हालत गंभीर है और उन्हें पीजीआई रोहतक रेफर किया गया है। दमकल की 17 गाड़ियों ने 12 घंटे जूझने के बाद आग पर काबू पाया। आग से साथ की दो अन्य फैक्टरी को भी नुकसान पहुंचा है।
फैक्टरी में आग बुझाने के उपकरण तक नहीं थे। इतनी बड़ी आगजनी होने के बाद भी फैक्टरी मालिक मौक पर नहीं पहुंचा। पुलिस ने कर्मचारी राकेश के बयान पर फैक्टरी मालिक गुलशन माटा, उसके बेटे अभिषेक माटा, मैनेजर मीनू व तीन सुपरवाइजर के खिलाफ लापरवाही का मुकदमा दर्ज किया है।
आग रविवार तड़के चार बजे के करीब लगी। घटना के समय फैक्टरी में 20 कर्मचारी सो रहे थे। आग लगते ही फैक्टरी की बिजली गुल हो गई। धुएं की वजह से कर्मचारियों की आंख खुली तो उन्होंने शोर मचाया। इनमें से 15 कर्मियों ने साथ के प्लाट की 15 फुट नीची छत पर कूदकर जान बचाई।
इनमें से 12 लोग झुलस गए, जबकि पांच लोग नहीं कूद सके। इनमें दो बच्चे और एक महिला भी थी। तीन के बुरी तरह से जले शव मिले हैं, जिनमें एक महिला और एक बच्चे का शव है। इनकी पहचान नहीं हो सकी है। बाकी दो जिनमें एक पुरुष और एक बच्चा शामिल है, लापता हैं।
आग पर काबू पाने की कोशिश करते कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
पेंट फैक्ट्री में रविवार तड़के लगभग चार बजे शार्ट-सर्किट से लगी आग में तीन कर्मी जिंदा जल गए, जबकि दो का कोई सुराग नहीं लग सका है। 12 कर्मी झुलस गए। इनमें से पांच को पीजीआई, रोहतक रेफर किया गया है। जबकि तीन सुरक्षित हैं। करीब 12 घंटे जूझने के बाद फायर ब्रिगेड की 17 गाड़ियां आग पर काबू पा सकीं।
आग ने चार अन्य फैक्ट्रियों को अपनी चपेट में ले लिया था। पुलिस ने मामले में एक कर्मी के बयान पर फैक्ट्री मालिक, उसके बेटे, मैनेजर और तीन सुपरवाइजर के खिलाफ लापरवाही का मुकदमा दर्ज कर लिया है। वहीं पुलिस जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री में आग बुझाने के कोई उपकरण नहीं थे।
दिल्ली निवासी गुलशन माटा की राई औद्योगिक क्षेत्र में प्लाट नंबर 291, 292 और 293 में रीयल पेंट के नाम से फैक्ट्री है। रविवार सुबह करीब चार बजे फैक्ट्री में शार्ट-सर्किट के चलते भीषण आग लग गई। उस समय फैक्ट्री में करीब 20 कर्मी सो रहे थे। आग लगते ही बिजली जाने पर सो रहे कर्मियों की आंख खुली तो धुआं देखकर शोर मचा दिया।
15 कर्मियों ने दूसरी फैक्ट्री करीब 15 फुट नीचे छत में कूदकर जान बचाई। 15 से 12 कर्मी कूदने और आग की चपेट में आने से घायल हो गए। वहीं फैक्ट्री की आग की चपेट में तीन कर्मी और दो बच्चे आ गए। इनमें से तीन के शव के अवशेष मिले हैं, जिसमें एक पुरुष, एक महिला और एक बच्चे के अवशेष बताए जा रहे हैं। देर रात एक बच्चे और एक कर्मी का कोई पता नहीं लग सका है।
फैक्ट्री में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
घटना में बिहार के मुजफ्फरपुर के गांव मेठी निवासी राकेश कुमार, यूपी के ओरैया निवासी गार्ड रामकुमार व उसकी पत्नी शकुंतला, मुजफ्फरपुर निवासी जालंधर, गुरदेव, संजीत झुलस गए, जिन्हें सोनीपत के अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं बिहार के वैशाली निवासी सुरेंद्र, मुजफ्फरपुर निवासी सोनू, हरिंद्र, चंदन, धर्मवीर और कुंदन को पीजीआई रेफर किया गया।
सुशील, दिलीप, वीरुराम सुरक्षित हैं। हादसे में उत्तराखंड निवासी बीर सिंह, उसकी पत्नी और पांच साल का बच्चा अभय, बिहार के मुजफ्फरपुर के गांव घोसरमा निवासी विरेंद्र राम और रणधीर झा लापता है। इनमें से तीन के शवों के अवशेष बरामद किए गए हैं। जिनके पूरी तरह से जल जाने के कारण पहचान नहीं हो सकी है, जबकि दो का पता नहीं चल सका है।
पूरी फैक्टरी राख हुई
पेंट और कैमिकल की वजह से आग लगातार बैकाबू होती गई। काबू पाने के लिए सोनीपत, गोहाना, गन्नौर, पानीपत, समालखा, रोहतक और नरेला से फायरब्रिगेड की 17 गाड़ियां मंगाई गईं। इन्होंने करीब 12 घंटे में आग पर काबू पाया। हालांकि देर शाम तक भी धुआं उठता रहा।
आग से पेंट फैक्टरी पूरी तरह से जल गई। फैक्टरी के साथ के प्लाट नंबर 309, 310, 311 व 312 में आग पहुंच गई। इनमें अतुल्य मेडिकोज, सुप्रीम व जैन पालीमर फैक्टरी को भी आग से नुकसान पहुंचा।
अस्पताल में भर्ती झुलसे हुए लोग
- फोटो : अमर उजाला
पेंट फैक्टरी में आग की घटना में तीन कर्मियों की मौत हुई है और दो अन्य लापता हैं। आग शार्ट-सर्किट से लगी है। मजदूरों ने कई बार वायरिंग की तारों में स्पार्किंग की शिकायत मालिक को दी थी, लेकिन इन्हें नहीं बदलवाया गया।
- ऋषिकांत, थाना प्रभारी, राई, सोनीपत
कंडम वायरिंग से चिंगारी निकलती थी तो मालिक कहता था-क्यों डरते हो
बिहार के मुजफ्फर जिला निवासी राकेश दो माह पहले ही दोबारा फैक्टरी में काम करने आया था। वह केमिकल मिक्स करने की मशीन पर काम करता है। उसने बताया कि कई जगह ओपन वायरिंग काफी कंडम हालत में है। इन्हीं जगहों पर कट लगाकर मशीन चलाई जाती थी। इनसे अक्सर चिंगारी निकलती थी। उसने इसकी शिकायत गुलशन माटा से की थी और कहा था कि किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इस पर उसका जवाब था कि डरते क्यों हो। मैं भी यहीं रहता हूं।