उसके बाद तीसरी मंजिल पर फंसे सुवर्धन को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला जा सका। इस दौरान करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद 12 गाड़ियों ने आग पर काबू पाया। हालांकि तब तक ऊपरी दो मंजिल में रखी मशीन व अन्य सामान जलकर क्षतिग्रस्त हो गई। बिल्डिंग भी काफी हद तक क्षतिग्रस्त हो गई। जिससे फैक्ट्री मालिक को भारी नुकसान हुआ है।
सोनीपत के साथ गोहाना व समालखा से पहुंचीं फायर ब्रिगेड
आग पर काबू पाने के लिए तुरंत प्रयास शुरू कर दिया गया। इसके लिए कुंडली के साथ ही सोनीपत, गोहाना, गन्नौर व समालखा से फायर टेंडर बुलवाए गए। रात करीब ढाई बजे आग पर काबू पाया गया। हालांकि पूरी तरह आग पर काबू सुबह तक हो सका। चॉकलेट व प्लास्टिक पैकिंग होने की वजह से आग पर काबू पाने में ज्यादा मशक्कत करनी पड़ी।
पेट्रोलिंग टीम ने दिखाई तत्परता, दो कर्मियों की बची जान
राई औद्योगिक क्षेत्र में रात को सुरक्षा के लिए उद्योगपतियों ने पेट्रोलिंग टीम लगाई है। रात को जब पेट्रोलिंग टीम के सदस्य गुरदीप, जितेंद्र, राहुल, देवेंद्र, धर्मेंद्र, शमशेर को पता लगा तो वह भी मौके पर पहुंच गए। उन्हें बताया गया कि एक कर्मी तीसरी मंजिल पर फंसा है। जिस पर टीम ने तुरंत प्रयास करते हुए कड़ी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला और जान बचाई।
राई औद्योगिक क्षेत्र में पहले भी हो चुकी है घटनाएं
राई औद्योगिक क्षेत्र में पहले भी आग लगने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। मार्च 2018 में पेंट फैक्ट्री में आग लगने से सात मजदूरों की जान चली गई थी। तब पुलिस ने फैक्ट्री मालिक के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया था। राई औद्योगिक क्षेत्र में गत्ता की फैक्ट्री होने के चलते यहां आग लगने का हर समय भय बना रहता है। उसके बावजूद अभी तक यहां पर फायर स्टेशन नहीं बनाया गया है। फायर स्टेशन बनाने को लेकर कई बार मांग उठाई जा चुकी है। उसके बावजूद यहां फायर स्टेशन का निर्माण नहीं हुआ। यहां एक गाड़ी खड़ी की गई, लेकिन आग भयानक होने पर उससे मदद नहीं मिल पाती।
आग पर काबू पाने का हो बेहतर प्रबंध
राई औद्योगिक मैन्यूफेक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश देवगन ने बताया कि राई क्षेत्र में आग की घटनाएं होने पर उसकी सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। राई औद्योगिक क्षेत्र में कई ऐसी कंपनियां हैं, जिनमें आग तेजी से भड़क सकती है। ऐसे में उस पर काबू पाने के लिए ठोस प्रबंध होने चाहिए। क्षेत्र में अग्निशमन केंद्र स्थापित किए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए जमीन भी अलॉट है। इसके बावजूद यहां केंद्र स्थापित नहीं हो सका है। इस दिशा में तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए।
रात को आग लगने की सूचना मिलते ही तुरंत कुंडली व सोनीपत से फायर टेंडर भेज दिए गए थे। बाद में अन्य स्थानों से भी टेंडर मंगवाए गए। चार घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। - विनोद कुमार, एएफओ सोनीपत।