केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय ने रिपोर्ट में कहा था कि चंडीगढ़ का जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। निगम को कम से कम ट्यूबवेल लगाना चाहिए, लेकिन कई कोशिशों के बावजूद ट्यूबवेल कम नहीं किए जा रहे हैं। वहीं, जितने भी नए मकान बन रहे हैं, वहां धड़ल्ले से बोरवेल हो रहे हैं, उस पर भी रोक नहीं लग पा रही है।
निगम का दावा था कि कजौली से अतिरिक्त पानी के बाद ट्यूबवेल कम कर देंगे, लेकिन यह भी संभव नहीं हो सका है। गिरते भूजल स्तर को देखते हुए 2019 में यूटी प्रशासन ने एक कमेटी बनाई थी। इसमें गांव के तालाबों को पुनर्जीवित करने का निर्णय हुआ। इसके लिए निगम और प्रशासन द्वारा तालाबों को गोद लेने की बात हुई, लेकिन इस पर कोई काम नहीं हुआ। वहीं पेवर ब्लॉक न लगाने के लिए भी निगम ने योजना बनाई, लेकिन इस पर भी अब तक कोई काम नहीं हुआ।
उस ट्यूबवेल में मिट्टी व रेत आता है। वहां का पानी पीने योग्य नहीं है। हालांकि ट्यूबवेल से पानी नहीं लेना पड़े, इसकी व्यवस्था होनी चाहिए। इसके लिए भी विचार करेंगे। -केके यादव, निगम आयुक्त