दिल्ली के करोल बाग स्थित अर्पित होटल में हुए अग्निकांड जैसा हादसा कभी भी चंडीगढ़ में भी हो सकता है। यहां हजारों लोगों की जानें खतरे में हैं। दिल्ली हादसे में 17 लोगों के मारे जाने की घटना के बाद भी चंडीगढ़ प्रशासन कोई सीख नहीं ले रहा है। शहर में 100 से अधिक छोटे व बड़े होटल्स हैं, जिनमें प्रतिदिन हजारों लोग ठहरते हैं।
शहर के होटल और हजारों की संख्या में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में फायर नियमों की अनदेखी कर सिस्टम के साथ खिलवाड़ किया जा रहा हैं। हालात ये हैं कि यहां आने और जाने के लिए केवल एक ही गेट रहता है। इमरजेंसी गेट भी ऐसा लगा होता है कि उसे तोड़कर खोलने में घंटों लग जाएं। ऐसे में यदि अचानक कोई घटना हो जाए तो जानमाल का खतरा हो सकता है। फिलहाल प्रशासन के फायर डिपार्टमेंट की ओर से रूल्स के नाम पर इन होटलों और विभिन्न प्रतिष्ठानों को सुरक्षा के प्रमाण पत्र बांट दिए हैं।
यहां नियमों की हो रही अनदेखी
फायर सर्विस एक्ट, नेशनल बिल्डिंग कोड एवं आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत निर्धारित मानक 15 मीटर से लंबी एवं अन्य व्यावसायिक भवनों में फायर सेफ्टी सिस्टम लगाना जरूरी है। इसके अलग-अलग रूल एवं कंडीशन भी निर्धारित किए हैं। लेकिन शहर के बनने के दशकों बाद भी यहां फायर सिस्टम सिफारिश पर चल रहा है। यदि कभी भी शहर के होटल्स और अन्य प्रतिष्ठानों में आग लग जाए तो हजारों जिंदगी खतरे में पड़ सकती हैं। विभागीय उदासीनता का परिणाम यह है कि बिना किसी व्यवस्था के लोगों को आपात स्थिति से जूझने के लिए छोड़ा हुआ है, आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है। इस पर प्रशासन से लेकर विभागीय अफसर मौन हैं।
खतरे में हर दिन हजारों लोगों की जान
शहर में 100 से अधिक होटल्स और हजारों व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अमूमन हर समय हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहते हैं। होटल्स में रुकने के अलावा शहर में विभिन्न कंपनियों के दफ्तर और हाईटेक ऑफिस मौजूद हैं। शहर में ज्यादातर कारपोरेट ऑफिस दूसरी या तीसरी मंजिल पर हैं। यहां पर सैकड़ों की संख्या में स्टाफ हर समय खतरे में रहता है। आपात स्थिति में यदि आग लग जाए तो इनके पास आग से निपटने के पर्याप्त संसाधन तक नहीं हैं। कई होटलों में न तो अलग से फायर के लिए वाटर टैंक है और न ही पंप एवं अन्य व्यवस्थाएं हैं। हालांकि तमाम होटल्स और ऑफिसों में में ये सिस्टम लगने जरूर हैं लेकिन प्रयोग में नहीं होने के चलते बदहाल पड़े हैं।
निर्देश की उड़ रही धज्जियां
प्रशासन ने 2015 में फायर सेफ्टी सिस्टम लगाने के निर्देश दिए थे लेकिन इनके मानकों पर कोई खरा नहीं उतर रहा है। फायर सेफ्टी एवं नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार एक हजार स्कवायर मीटर तक बनी कामर्शियल बिल्डिंग के लिए भी अलग से नियम निर्धारित हैं। होटल्स और ऑफिस के मामले में यह और संवेदनशील हो जाता है। नियमानुसार इनकी बिल्डिंग के बेसमेंट में पार्किंग एवं स्टोरेज की व्यवस्था को छोड़कर अन्य गतिविधियां नहीं की जा सकती हैं। इसी के साथ बेसमेंट में फायर के लिए अलग से दस हजार लीटर का वाटर टैंक और पाइपलाइन के साथ अन्य व्यवस्थाएं करना जरूरी है।
डिपार्टमेंट करता है कड़ाई
नियमानुसार किसी भी बिल्डिंग का नक्शा पास कराने से पहले फायर डिपार्टमेंट की अनुमति आवश्यक है। लोग शुरू में तो विभाग के पास आ जाते हैं, लेकिन जब बिल्डिंग बनकर तैयार हो जाती है तब सेटिंग के सहारे एनओसी भी पा लेते हैं। आम लोगों की सुरक्षा की बात करें तो फायर डिपार्टमेंट की ओर से चीजों की व्यवस्थित करने के लिए कड़ाई की जाती है। लेकिन समय बीतने के साथ ही लोग गतिविधियों में बदलाव कर देते हैं।
विभाग ने संस्थानों को भेजा नोटिस
चंडीगढ़। बीते साल औद्योगिक क्षेत्र में लगी आग के बाद विभाग ने शहर के सार्वजनिक भवनों की चेकिंग के दौरान अनेक भवनों में फायर सेफ्टी एक्ट का उल्लंघन पाया था। विभागीय सूत्रों के अनुसार शहर में करीब 65 स्कूल भवन ऐसे हैं, जहां फायर सेफ्टी एक्ट का पूरी तरह से अनुसरण नहीं किया गया है। इसके अलावा शहर के दर्जनों रेस्तरां, होटल, सरकारी भवन में तमाम कमियां मिली थीं। अधिकारियों ने बताया कि करीब 14 सार्वजनिक इमारतों में अचानक की गई चेकिंग के दौरान पाया गया कि यहां आग सुरक्षा प्रणालियों में तमाम खामियां हैं। इनमें लगाए गए अग्नि सुरक्षा उपकरणों में से अधिकांश खराब मिले थे।
जिन होटल और संस्थानों में कमियां मिली थी, उन्हें नोटिस भेजकर कार्रवाई की जा रही है।
- अनिल कुमार गर्ग, फायर अफसर