अतिरिक्त उपायुक्त की अदालत ने उपभोक्ताओं को धोखा देकर ठगी करने पर चार अलग-अलग फर्मों पर 14.50 लाख का जुर्माना लगाया गया है। इसमें सरसों के तेल की बोतल पर 1000 ग्राम का लेबल लगाकर उसमें 580 ग्राम पैक करने वाली फर्म पर 10 लाख का जुर्माना लगाया गया।
पुरानी सब्जी मंडी के पास सरसों के तेल की पैकिंग करने वाली एक फर्म की प्रशासनिक अधिकारियों ने जांच की। इसमें कंपनी की ओर से पैक कर बेची जा रही बोतल को सैंपल के तौर पर लिया गया। फूड सेफ्टी एक्ट के तहत बोतल के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया। जब तोल किया तो बोतल में 580 ग्राम सरसों का तेल निकला। बोतल पर लगे लेबल पर 1000 ग्राम लिखा गया था। हर बोतल में करीब 420 ग्राम तेल कम देकर उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी की जा रही थी। अदालत में चले अभियोग के बाद एडीसी की अदालत ने फर्म पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह फर्म पिछले 12 साल से सरसों के तेल का कारोबार कर रही थी। बोतल का डिजाइन घुमावदार कर इस तरह का बनाया गया था कि देखने में पूरी बोतल दिखती थी। तेल निकाल कर मापा तो करीब 420 ग्राम कम निकलता था।
केस नंबर दो
अनाज मंडी में सरसों के तेल की दुकान पर 25 दिसंबर 2015 को सैंपल लिए गए थे। इस पर फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अॅथारिटी ऑफ इंडिया एफएसएसआई का मार्का नहीं लगा था। बिना मार्का तेल को पैक कर बेचना पूरी तरह से अवैध है। इसके बाद विभाग की ओर से यह केस एडीसी कोर्ट में भेजा गया था। इस फर्म पर एडीसी कोर्ट ने 1.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
उत्पाद के बारे में हर जानकारी देना जरूरी
mustard oil bottle
कोल्ड ड्रिंक में कलर न लिखने पर तीन लाख
डीएन कॉलेज रोड पर एक इंटरनेशनल ब्रांड कोल्ड ड्रिंक के सैंपल लिए। इसमें 17 अगस्त 2015 को कंपनी के रिटेल कारोबारी और 30 अगस्त 2015 को कंपनी के मेन स्टाकिस्ट के यहां सैंपल लिए गए। इन दोनों पर सैंपल पर कोल्ड ड्रिंक के कलर को नहीं लिखा गया था। इस पर रिटेल कारोबारी और मेन स्टाकिस्ट दोनों को 1.50-1.50 लाख का जुर्माना लगाया है।
उत्पाद के बारे में हर जानकारी देना जरूरी
2011 के फूड सेफ्टी एक्ट के अनुसार अगर किसी उत्पाद को पैकिंग कर बेचा जाता है तो उस पर लेबल होना चाहिए। इस पर कंपनी का नाम, पता, उत्पाद की मात्रा, उत्पाद में डाले गए कंटेंट, बैच नंबर, लॉट नंबर, एक्सपायरी डेट, एफएसएसएआई मार्का, लाइसेंस नंबर का उल्लेख होना चाहिए। ऐसा न होने पर एडीसी की कोर्ट में केस चलाया जाता है। अगर उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर किसी तरह का सैंपल लिया जाए तो उसका केस सिविल कोर्ट में चलाया जाता है। इसमें क्रिमिनल केस चलाया जाता है।
तीन महीने में 20 लाख का जुर्माना
पिछले तीन महीने में एडीसी कोर्ट लेबल और मार्का संबंधी पांच फैसले दे चुकी है। इसमें अब तक कुल 20 लाख 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। करीब दो महीने पहले हल्दी-मिर्च की फर्म पर छह लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
मानकों पर खरा न उतरने वाली फर्मों के केस एडीसी कोर्ट में चलाए गए थे। इनमें तीन अलग-अलग फर्मों 14.50 लाख रुपये पर जुर्माना लगाया गया है। एक हजार ग्राम बताकर 580 ग्राम पैकिंग देने वाली फर्म पर 10 लाख का जुर्माना लगाया है।
-प्रेम सिंह, गवर्नमेंट फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर हिसार