चंडीगढ़। वैट के पुराने मामले कई वर्षों बाद भी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर लंबित पड़े हैं। प्रशासक के सलाहकार और वैट ट्रिब्यूनल के चेयरमैन धर्मपाल के पास भी 29 केस लंबित हैं। वहीं, वित्त सचिव के पास 289 केस पड़े हैं। यह खुलासा एक आरटीआई में हुआ है। यह स्थिति तब है जब वरिष्ठ अधिकारियों की तरफ से लगातार समय पर केसों को निपटाने के आदेश जारी किए जाते हैं।
जीएसटी लागू होने से पहले वैट हुआ करता था। धर्मपाल वैट के साथ कई अन्य ट्रिब्यूनल के भी चेयरमैन हैं लेकिन आरटीआई के अनुसार बीते दो साल में उन्होंने महज चार केसों का ही निपटारा किया है। एस्टेट ऑफिस के आदेशों के खिलाफ वित्त सचिव के पास बतौर चीफ एडमिनिस्ट्रेटर केस सुनने की शक्ति है लेकिन इस दफ्तर में भी कई केस लंबित पड़े हैं। आरटीआई के अनुसार, वित्त सचिव के पास एस्टेट ऑफिस से संबंधित 289 केस व अपील लंबित हैं। हैरान करने वाली बात है कि वर्ष 2011 के एस्टेट ऑफिस से जुड़े एक मामले में अपील फाइल की गई थी। इसका 11 साल के बाद कुछ दिन पहले निपटारा हुआ है।
प्रशासक के पूर्व सलाहकार ने पकड़ा था घोटाला
लंबित केसों को लेकर एक आरटीआई डाली गई थी जिसके जवाब में सलाहकार के कार्यालय में लंबित वैट के मामलों की जानकारी दी गई है। बीते दो साल में वैट से जुड़े महज चार केस ही निपटाए गए हैं। बता दें कि इससे पहले वैट के ही एक मामले में पूर्व सलाहकार के ट्रिब्यूनल ने कई करोड़ का घपला पकड़ा था और मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए थे। बाद में जांच जब विजिलेंस के पास पहुंची तो कई विभाग घेरे में आए।
आरटीआई का जवाब देने में डीसी ऑफिस करता है गोलमोल
शहर के कई लोगों की शिकायत रहती है कि डीसी ऑफिस की तरफ से आरटीआई का जवाब नहीं दिया जाता। वह सभी आरटीआई में जवाब देने के नाम पर टालमटोल करते हैं। आरटीआई के तहत एक मामले की सुनवाई 90 दिनों से भी ज्यादा समय से लंबित पड़ी है। डीसी विनय प्रताप सिंह 13 जनवरी तक छुट्टी पर हैं और उनकी जगह पद सीएचबी के सीईओ यशपाल गर्ग के पास है। मंगलवार को एडीसी के समक्ष इसकी सुनवाई है। यह सुनवाई भी तब हुई है, जब यशपाल गर्ग ने लंबित मामलों पर कार्रवाई करनी शुरू की और उन्हें तत्काल निपटाने के आदेश दिए।