रोजगार उत्पादन में सिटी ब्यूटीफुल पूरे देश में फिसड्डी साबित हुआ है। वहीं, पंजाब और हरियाणा भी रोजगार देने में काफी पीछे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत चंडीगढ़ में वर्ष 2019-20 में सिर्फ 72 लोगों को रोजगार मिला, जो पूरे देश में सबसे कम है। वहीं, पंजाब में 6784 जबकि हरियाणा में 7136 लोगों को योजना के तहत रोजगार मिला।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम पूरे देश में लोन मुहैया कर युवाओं को अपना उद्योग स्थापित करने और फिर अन्यों के लिए नौकरियां पैदा करने के लिए शुरू किया गया था। यह केंद्र सरकार की एक स्वरोजगार योजना है। इसके तहत उद्योग लगाने पर 25 लाख और सेवा क्षेत्र में निवेश करने पर 10 लाख रुपये कर्ज मिलता है लेकिन चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के लिए इसके आंकड़े डराने वाले हैं।
पिछले चार साल से इस स्कीम के तहत पैदा होने वाली नौकरियों की संख्या लगातार कम हो रही है, जो चिंता की बात है। आंकड़ों के अनुसार, चंडीगढ़ में इस साल सिर्फ 72 लोगों को ही रोजगार मिल सका है जबकि वर्ष 2018-19 में 224, वर्ष 2017-18 में 360 और वर्ष 2016-17 में 376 लोगों को इस योजना के तहत रोजगार मिला था। चंडीगढ़ अन्य केंद्र शासित प्रदेशों से भी काफी पीछे है। पीएमईजीपी के तहत पूरे देश में इस वर्ष सिर्फ 224136 रोजगार ही पैदा हुए हैं जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 587416 का था।
पंजाब और हरियाणा में भी घटा रोजगार
भारत सरकार ने यह आंकड़े राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में पेश किए है। आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में पीएमईजीपी के तहत वर्ष 2019-20 में सिर्फ 6784 रोजगार ही पैदा हुए हैं। इसके अलावा वर्ष 2018-19 में 14408, वर्ष 2017-18 में 12160 और वर्ष 2016-17 में 9858 रोजगार मिले थे। हरियाणा में भी हालात ठीक नही हैं। हरियाणा में पीएमईजीपी के तहत वर्ष 2019-20 में सिर्फ 7136 रोजगार पैदा हुए हैं जबकि वर्ष 2018-19 में यहां 17320, वर्ष 2017-18 में 13744 और वर्ष 2016-17 में 11016 लोगों को योजना के तहत रोजगार मिला था।
क्या है पीएमईजीपी का उद्देश्य
केंद्र सरकार इस योजना के माध्यम से युवाओं में स्व रोजगार को बढ़ावा देना चाहती है। उद्देश्य है कि लोग ग्रामीण, कस्बाई या शहरी इलाके में छोटे-छोटे कारोबार शुरू कर एक तरफ जहां अपने जीवनयापन के लिए साधन बना सकते हैं। वहीं इसमें काम पर दो-चार लोगों को लगाकर उनकी जीविका का साधन भी बना सकते हैं। लेकिन सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़े के अनुसार यह योजना अब फेल साबित होती दिखाई दे रही है।