बरवाला के सतलोक आश्रम से अवमानना के मामले में अदालत न पहुंचने की जिद पर अड़े संत
रामपाल को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस की संत के अनुयायियों से हिंसक झड़प हो गई।
हिंसा में आश्रम के अंदर पांच अनुयायियों की मौत हो गई और 150 पुलिसकर्मी व 50
अनुयायी घायल हुए हैं। हालांकि सरकारी तौर पर हिंसा में मौतों की पुष्टि नहीं हुई
है। आईजी ने बताया कि देर रात आश्रम से करीब ढाई हजार लोगों ने समर्पण कर
दिया।
मंगलवार दोपहर को आश्रम के बाहर पहुंचे आरएएफ, सीआरपीएफ और पुलिस के करीब तीस
हजार जवानों पर अनुयायियों ने बलवाइयों की तरह सीधे फायरिंग शुरू कर दी। आश्रम की
छतों पर तैनात संत के हजारों समर्थकों और निजी कमांडो ने पुलिसकर्मियों पर पेट्रोल
बम, तेजाब से भरी बोतलें और पत्थर भी फेंके।
जवाब में पुलिस ने भी जमकर आंसू गैस के
गोले छोड़े और लाठीचार्ज कर आश्रम के बाहर डटे समर्थकों को बसों में भरकर बाहर
भेजा। देर शाम तक पुलिस 500 मीटर पीछे हटकर नाके पर आ गई थी।
50-60 समर्थकों ने दी आत्मदाह की धमकी
कानून की अवहेलना करने वाले संत रामपाल की जिद के चलते सतलोक आश्रम का नजारा किसी
दंगे के जैसा था। अब तक महिलाओं बच्चों की आड़ में पुलिस से बचते आए रामपाल के चेले
खुलेआम गुंडागर्दी पर उतर आए।
सोमवार शाम को संत की गिरफ्तारी को लेकर आश्रम के
बाहर हुई गहमागहमी ने मंगलवार सुबह हिंसक रूप धारण कर लिया। दोपहर 12 बजे के करीब
जब पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों ने आश्रम की ओर बढ़ना शुरू किया तो आश्रम के सामने
एकत्रित समर्थकों ने एक पुतला बनाकर उसमें आग लगा दी। इसी दौरान उन्हें रोकते हुए
पुलिस कर्मियों ने आश्रम के मुख्य गेट की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया। पुलिस को बढ़ता
देख गेट के सामने 50-60 समर्थकों ने खुद पर डीजल-पेट्रोल डालकर आत्मदाह की धमकी दी।
इस पर आश्रम के सामने की पुलिस फोर्स तो रुक गई लेकिन कुछ पुलिसकर्मी आश्रम के पीछे
से आगे बढ़े।
यह देखकर रामपाल के समर्थकों ने मुख्य गेट की तरफ आ रहे
पुलिसकर्मियोें पर गोलीबारी कर शुरू कर दी और छत पर खडे़ समर्थकों ने पेट्रोल बम और
तेजाब से भरी बोतलें फेंकनी शुरू कर दीं। जवाब में पुलिस ने रामपाल समर्थकों
पर आंसू गैस के गोल छोड़े। इसके साथ ही कुछ पुलिस कर्मी आगे बढ़े और गेट के सामने
बैठी महिलाओं और बच्चों को बसों में बैठाकर भेजने लगे।
पुलिस ने दिया आधे घंटे का अल्टीमेटम
इसके अलावा कुछ मीडियाकर्मी भी पुलिस की मारपीट का शिकार हुए। उनके साजोसामान भी
पुलिस न तोड़ दिए। आश्रम के प्रवक्ता राहुल का दावा है कि अनुयायियों की मौत आंसू
गैस के गोलों के कारण दम घुटने से हुई है। पुलिस मरने वालों की किसी जानकारी से
इनकार कर रही है।
आईजी अनिल राव ने बताया कि देर रात आश्रम से करीब ढाई हजार लोगों ने पुलिस के
सामने समर्पण कर दिया। जांच के बाद इन लोगों को वहां भेजा जाएगा जहां ये जाना चाहते
हैं। जांच इसलिए की जाएगी क्योंकि रामपाल के भी भीड़ में शामिल होकर भागने का
अंदेशा है।
पुलिस ने दिया आधे घंटे का अल्टीमेटम
आश्रम की दीवार गिराने के बा पुलिस ने 4.30 बजे के करीब रामपाल समर्थकों को
आधे घंटे में आश्रम खाली करने का निर्देश दिया लेकिन समर्थक आश्रम से बाहर नहीं
निकले। कुछ लोग ही बीमारी आदि का बहाना बनाकर आश्रम से निकले, जिनका पुलिस ने ताली
बजाकर स्वागत किया। अल्टीमेटम खत्म होने के बाद पुलिस कुछ आगे बढ़ी लेकिन समर्थक और
उग्र हो गए तो पुलिस बिना कार्रवाई किए पीछे लौटने लगी और धीरे-धीरे पूरी फोर्स
पीछे हट गई।
मरने वालों में एक दिल्ली निवासी
आश्रम के प्रवक्ता राहुल का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई में पांच अनुयायियों
की मौत हुई है। इनमें से दो की पहचान 50 वर्षीय दिल्ली निवासी सरिता और 55 वर्षीय
पंजाब निवासी भजन कौर के रूप में हुई है। तीन मृतकों की पहचान करने की कोशिश की जा
रही है।
ये हुए घायल
डीएसपी लोहारू जगत सिंह, हेड कांस्टेबल जींद कर्मवीर, कांस्टेबल धीरू, कांस्टेबल भिवानी सविता, ईएचसी पानीपत सुखपाल, इंस्पेक्टर जींद सुरेंद्र, कांस्टेबल हिसार छोटूराम, हेडकांस्टेबल हिसार राकेश, कांस्टेबल मधुबन संदीप, ललित, वीरेंद्र और संदीप, कांस्टेबल हरपाल, कांस्टेबल जींद कुलदीप, एएसआई फतेहाबाद बलजीत, कांस्टेबल जींद राजपाल, एएसआई रणबीर, कांस्टेबल तरसेम, कांस्टेबल मधुबन राजपाल, सुरेंद्र पाल और विकास, कांस्टेबल पानीपत संदीप, कांस्टेबल फतेहाबाद रोहताश, कांस्टेबल मधुबन नेपाल, कांस्टेबल फतेहाबाद बलविंद्र व एएसआई मधुबन विजय, जितेंद्र, दीपक, सतीश सहित अन्य शामिल हैं। मीडिया कर्मियों में दिल्ली के सुनील, सुरेंद्र, अनुज अग्रवाल और बंसीलाल शामिल हैं। वहीं घायल होने वाले अनुयायियों में छत्तीसगढ़ की सुलेखा, बहालगढ़ (सोनीपत) का योगेंद्र दास, शिमला (कैथल) का संतोषदास और जयपुर का रामकिशोर और प्रियंका शामिल हैं।
लॉकर में रखे हैं असलहे
पुलिस ने बताया है कि सुमित व मनबीर के पास लाइसेंसी हथियार भी हैं। उन्होंने पिछले करीब दो साल से नाम दीक्षा ले रखी है। इनमें से सुमित एक पब में प्राइवेट सिक्योरिटी में काम करता है। संत की गिरफ्तारी के मामले पर वह आश्रम में आया था। उसके पास तीन लाइसेंसी हथियार भी हैं जिन्हें वे आश्रम के गेट के पास बने लॉकर में रखते हैं।
यहां मरे तो मिलेगा स्वर्ग!
सुमित ने पुलिस को बताया कि आश्रम के अंदर अनुयायियों को उत्साहित किया जाता है कि यहां मरने वाले सीधे स्वर्ग में जाएंगे। इसलिए संत की सेवा करने में सब कुछ न्यौछावर कर दो। आश्रम में बार बार अनुयायियों को प्रेरित किया जा रहा है कि आश्रम में मरने वालों को जन्म मरण से मुक्ति मिलेगी।
कितने श्रद्धालु दिया ब्यौरा
पकड़े गए युवकों ने बताया है कि आश्रम में ऐसे करीब डेढ़ सौ हथियारबंद लोग सिक्योरिटी में लगे हैं। करीब 4 से 5 हजार बच्चे व औरतें हैं। इसके अलावा छह हजार अन्य लोग हैं जिनमें 80 प्रतिशत नौजवान हैं।
छतों पर रखे हैं पेट्रोल बम और तेजाब भरी बाल्टियां
आरएएफ, सीआरपीएफ और पुलिस के जवानों से मोर्चा लेने के लिए संत के अनुयायियों ने आश्रम में पूरी तैयारी कर रखी है। वह किसी भी हालत में संत की गिरफ्तारी नहीं होने देंगे। आश्रम की छतों पर पेट्रोल बम व तेजाब की बाल्टियां भी रखी गई हैं। वहां लॉकर में भारी मात्रा में हथियार रखें हुए हैं।
करीब छह हजार नौजवान इन हथियारों को चलाने के लिए तैयार बैठे हैं। वह शिफ्ट वाइज पुलिस की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। यह खुलासा बरवाला सतलोक आश्रम के बाहर से पकड़े दो अनुयायियों ने किया है। इन अनुयायियों को पुलिस ने रविवार देर रात गिरफ्तार किया था इनकी पहचान बहराणा के सुमित व संगतपुरा जिला जींद निवासी मनबीर के रूप में हुई है।
पुलिस ने दोनों अभियुक्तों 32 बोर के पिस्टल व 10 जिंदा कारतूस व 6 नुकीले सुए बरामद किए हैं हुए। सीआईए इंस्पेक्टर मुकेश कुमार ने बताया कि दोनों संत के अनुयायी हैं और गुंडा प्रवृति के हैं। सोमवार को पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया जहां से दिन का रिमांड मंजूर हुआ है।
पहले पुलिस को पीछे हटाने पर सवाल
गौरतलब है कि 30000 हजार जवानों की तैनाती के बाद भी संत रामपाल की गिरफ्तारी नहीं हो पाई। तीन बार कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद भी प्रदेश सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
हार बार कभी मेडिकल का हवाला तो कभी कानून व्यवस्था बिगड़ने का हवाला देकर बचने की कोशिश। रविवार देर रात जब प्रवक्ता राजकपूर ने कहा कि संत सोमवार सुबह आठ बजे कोर्ट में पेश हो जाएंगे।
तो पता नहीं क्यों प्रशासन ने उनकी बात पर विश्वास कर पुलिस को पीछे हटा लिया। आश्रम में कितने असलहे हैं और कितने अनुयायी मौजूद हैं? पुलिस प्रशासन के पास इस बात की ठोस जानकारी नहीं है। कोर्ट के आदेश के बाद से ही वहां समर्थकों का मजमा लगने लगा था।
संत से सीधे बात करने की कोशिश क्यों नहीं
पिछले चार दिनों से पुलिस एवं प्रशासनिक महकमे के किसी भी अधिकारी ने संत से सीधे बात करने की कोशिश नहीं की। सिर्फ उनके प्रवक्ता के माध्यम से ही बात चल रही है, जिससे यह अंदाजा नहीं लग पा रहा कि संत कहां और किस स्थिति में हैं।
सीआरपीएफ, आरआएफ और पुलिस के जवान एक बार फिर आश्रम के पास तक पहुंचे। लेकिन अनुयायियों का विरोध देखकर उन्हें लौटना पड़ा। कमांडो संत के पुलिस की कार्रवाई के दौरान असलहा लेकर निकले और जमकर शक्ति प्रदर्शन किया। घरों की बिजली और पानी आश्रम के आसपास काट दी गई है, जिससे लोग परेशान हैं। बच्चे स्कूल भी नहीं जा रहे हैं।
कई बार प्रशासनिक एंव पुलिस अधिकारियों ने आश्रम खाली कराने की मुनादी करवाई लेकिन अनुयायियों ने उल्टा इसका विरोध किया। वाहन पुलिस ने कब्जे में लिए। इनमें 40 बसें आश्रम की और 150 वाहन निजी हैं जो अनुयायी लेकर पहुंचे हैं।