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बारिश से उफान पर उज्ज, जलालिया और चक्की दरिया, जनजीवन अस्त-व्यस्त

Sun, 18 Aug 2019 01:25 AM IST
Abhishek Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पठानकोट/बमियाल
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उफान पर नदियां - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
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पठानकोट और उससे सटे पहाड़ी क्षेत्रों में 12 घंटे से लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। पठानकोट की सीमा से गुजरते उज्ज, जलालिया और चक्की दरिया पूरे उफान पर हैं, तीनों दरियाओं में 70 से 98 हजार क्यूसिक पानी है। शनिवार तड़के चक्की और उज्ज दरिया में बढ़े जलस्तर के बाद डीसी, एसडीएम समेत नहरी विभाग और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।

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वहीं पठानकोट से मनवाल को जाते रास्ते पर पड़ते बरसाती नाले खड्डी में भी जलस्तर बढ़ने से 50 से अधिक गांवों का सीधा संपर्क टूट गया। पठानकोट-चंबा रोड पर आरएसडी के पास भू-स्खलन से मार्ग बाधित हो गया, जिसके चलते मणिमहेश जाने वाले यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा चक्की में बढ़ते जलस्तर को लेकर पार्षद योगेश ठाकुर ने सांसद सनी देओल को अवगत करवा दिया है। अगर चक्की का बहाव इसी तरह रहा तो चक्की क्वारी रेलवे लाइन भी इसकी चपेट में आ जाएगी।

हर घंटे पाकिस्तान छोड़ा जा रहा 4 हजार क्यूसिक पानी

शुक्रवार रात और शनिवार सुबह बरसात और चमेरा बांध से छोड़े गए 70 हजार क्यूसिक पानी से रणजीत सागर बांध झील लबालब है। यहां खतरे के निशान से महज 5 मीटर का मार्जिन बचा है, अधिकारियों का कहना है कि हाइडल नहर और माधोपुर ब्यास लिंक नहर पहले भी फुल चल रही हैं, ऐसे में आपात स्थिति से बचने के लिए माधोपुर हेडवर्कस से पाकिस्तान को हर घंटे 4 हजार क्यूसिक पानी छोड़ना पड़ रहा है। इसके अलावा बिजली पैदा करने वाले दो यूनिट चल रहे थे, अब तीसरा भी शुरू कर दिया गया है।
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आरएसडी के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर नरेश महाजन ने बताया कि झील में स्टोरेज क्षमता 527 मीटर है जबकि 525.90 मीटर तक ही पानी स्टोर किया जाता है। इसके बाद फ्लड गेटों को खोला जाएगा, फिलहाल चमेरा से भारी मात्रा में पानी आ रहा है, वहीं डैम में 11 सेमी. तक की बरसात रिकॉर्ड हुई है। अगले 3 दिन भारी बरसात की चेतावनी है, ऐसे में बांध प्रशासन हर स्थिति से निपटने को तैयार है। 

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गुर्जरों ने खाली किए डेरे, सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए मवेशी

उज्ज दरिया का जलस्तर बढ़ने से कई गुर्जर समुदाय के कई डेरे पानी की चपेट में आए हैं, हालांकि किसी तरह के नुकसान की बात सामने नहीं आई पर दरिया किनारों पर बसे दर्जनों गुर्जर परिवारों ने डेरे खाली कर दिए हैं, मवेशियों और परिवार को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। डीसी ने लोगों को दरिया किनारे से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। 

डीसी रामबीर ने बताया कि उज्ज दरिया का जलस्तर 98 हजार क्यूसिक पर पहुंच गया था जो बाद दोपहर घट कर 72 हजार क्यूसिक रह गया, वहीं चक्की दरिया का जलस्तर 70 हजार क्यूसिक था जो अब 48 हजार क्यूसिक बचा है, अगर बरसात न हुई तो पानी घटने की संभावना है। प्रशासनिक टीमें बांध और दरियाओं के जलस्तर पर नजर बनाए हैं।

दूसरे दिन भी खुले रहे भाखड़ा डैम के फ्लड गेट

हिमाचल के ऊपरी क्षेत्रों ओर पंजाब में लगातार हो रही बारिश के चलते भाखड़ा डैम में लगातार भारी मात्रा में पानी की आमद दर्ज की जा रही है। इसके चलते शनिवार को दूसरे दिन भी भाखड़ा डैम के फ्लड गेट खुले रहे। सतलुज दरिया के किनारे स्थित कई गांवों के खेतों में पानी घुसने से फसल बरबाद हो गई और एलग्रां से बेलाध्यनी की और जाने वाली संपर्क सड़क भी पानी की भेंट चढ़ गई जिससे कुछ गांवों का संपर्क आपस में कट गया।

बीबीएमबी द्वारा दर्शाए गए आंकड़ों के अनुसार शनिवार को डैम में विभिन्न स्रोतों से आने वाले पानी की आमद 57,867 क्यूसेक दर्ज की गई जिससे भाखड़ा डैम का जल स्तर 1674.61 फुट तक जा पहुंचा। भाखड़ा डैम से टरबाइनों के माध्यम से 45100 क्यूसेक पानी छोड़ कर 337 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन किया गया जबकि फ्लड गेट के माध्यम से 19 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया।

नंगल से निकलने वाली नंगल हाइडल नहर में 12500 क्यूसेक, श्री आनंदपुर साहिब हाइडल में 10150 जबकि नंगल डैम से सतलुज दरिया की तरफ 30 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा जा रहा है। इससे उपमंडल नंगल और श्री आनंदपुर साहिब के अधीन सतलुज दरिया के किनारे आते विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ के हालात पैदा हो गए हैं।
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