पवन कुमार बंसल, पूर्व रेल मंत्री के अनुयार, 'मुझे रेल बजट से काफी उम्मीदें थीं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सरकार श्रेय ले रही है कि किराया नहीं बढ़ाया जा रहा है यह तो गुमराह करनेवाली बात है। पारदर्शिता नहीं दिखाई गई।'
डीजल के कीमतों में कमी के कारण रेल किराया में कमी होनी चाहिए थी। जब मोदी की सरकार बनी तो तुरंत 14 प्रतिशत किराया बढ़ा दिया था। उस समय डीजल की कीमतें बढ़ी थीं। लेकिन अब डीजल की कीमतें कम हो गई तो रेल का किराया भी कम होना चाहिए था। इसे पार्लियामेंट में पास किया गया था। छह महीनों में इसकी समीक्षा होनी थी। नौ महीने में डीजल की कीमत में काफी कमी आई है।
नई ट्रेन चलाने की कोई घोषणा नहीं हुई। रेल मंत्री प्रभु ने कहा है कि बजट सेशन के दौरान घोषणा करेंगे। अभी इसे देखना है। कई चीजों में श्रेय लेने की कोशिश की गई है।
प्रधानमंत्री मोदी कहते थे आसमान से चांद ला दूंगा। दूध दही की नदियां
बहेंगी। लेकिन यह रेल बजट तो रूटीन लगता है। रेल बजट से मुझे काफी निराशा
हुई है। उम्मीद के अनुसार बजट पेश नहीं किया।