चंडीगढ़। कोरोना मरीजों की मनमर्जी और लापरवाही घातक साबित होती जा रही है। मरीज फॉलोअप में झूठ बोल रहे हैं। इसकी वजह से कोरोना से होने वाली मौतों पर स्वास्थ्य विभाग का प्रयास भी विफल साबित हो रहा है। कोरोना संक्रमण के साथ गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों का सहयोग न मिलने से स्थिति गंभीर बन जाती है।
स्वास्थ्य निदेशक डॉ. अमनदीप कौर कंग ने मेडिकल एडवाइजरी पर गंभीर स्थिति वाले मरीजों के बचाव के लिए उनके हस्ताक्षर लेने का भी निर्देश जारी किया है, लेकिन मरीज एडवाइजरी पर अस्पताल न जाने की बात लिख कर हस्ताक्षर कर दे रहे हैं। डॉ. कंग का कहना है कि यह स्थिति गंभीर मरीजों के लिए घातक सिद्ध हो रही है। इनकी वजह से स्वास्थ्य विभाग कोरोना से हो रही मृत्यु दर पर काबू नहीं पा रहा। डॉ. कंग ने कहा कि ऐसे मरीजों को जागरूक होने की जरूरत है। परिवार और घर के मोह में फंसकर परिजनों को परेशानी में डाल रहे हैं। वे स्थिति बिगड़ने से पहले डॉक्टर की देखरेख में आ जाएं तो बेहतर उपचार मिल सकता है।
लापरवाही ले जा रही मौत के करीब
डॉ. कंग का कहना है कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कोरोना के संक्रमित मरीजों में अचानक ही ऑक्सीजन का स्तर तेजी से नीचे आने लगता है। ऐसे मरीजों को बार-बार आगाह किया जा रहा है, ऑक्सीजन का स्तर 95 से नीचे आने से पहले वे खुद को अस्पताल पहुंचें ताकि स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सके। इससे डायबिटीज, हाइपरटेंशन, किडनी, कैंसर और कुछ अन्य गंभीर बीमारियों वाले मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है।
फॉलोअप में बोल रहे झूठ
डॉ. कंग ने कहा कि एकांतवास में रह रहे मरीज अस्पताल आने के डर से फॉलोअप में झूठ बोल रहे हैं। उनका झूठ बोलना भारी पड़ रहा है। फॉलोअप में बार-बार पूछने पर भी वे ऑक्सीजन लेवल और अन्य परेशानियों के बारे में सही जानकारी नहीं दे रहे हैं। इससे एकांतवास में रह रहे मरीजों की स्थिति अचानक बिगड़ जा रही है।
टीम की दोबारा प्रशिक्षित किया
डॉ. कंग ने कहा कि ऐसी स्थिति से निपटने के लिए रैपिड रिस्पांस टीम की दोबारा ट्रेनिंग कराई गई है। ट्रेनिंग के दौरान उन्हें ऐसे मरीजों की काउंसिलिंग की जानकारी दी गई है ताकि वह मरीजों के घर जाकर लापरवाही से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में सचेत कर सकें। टीम को यह भी निर्देशित किया गया है कि जिन मरीजों के फ़ॉलोअप में झूठी रिपोर्ट आ रही है, उनके परिवार को इससे अवगत कराएं, ताकि बाद में परिजन किसी भी तरह की लापरवाही का आरोप न लगा सकें।