भारत में फैटी लिवर की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। देश में प्रति वर्ष फैटी लिवर के एक करोड़ से ज्यादा मरीज मिल रहे हैं, जो कि गंभीर चिंता का विषय है। फैटी लिवर होने के मुख्य कारणों में शराब, जंक फूड का सेवन और भोजन व जीवनशैली में बदलाव प्रमुख रूप से शामिल हैं।
ईएसआईसी मॉडल अस्पताल लुधियाना में संगोष्ठी के दौरान आयुर्वेद विभाग की सीएमओ डॉ. पूजा मजोतरा ने बीमित व्यक्ति और उनके आश्रितों को फैटी लिवर के लक्षण, बचाव और उपचार के बारे में जागरूक किया और बताया कि यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें लिवर में अतिरिक्त वसा कोषिकाएं जमां होने लगती हैं। इससे लिवर में सूजन आती है, जो आगे चलकर चलकर अन्य बीमारियां पैदा करती है।
जंक फूड का सेवन, घी से बने पदार्थ, मैदे की वस्तुएं, पचने में भारी खाना व शराब के सेवन से फैटी लिवर की समस्या उत्पन्न हो सकती है। यह बीमारी दो प्रकार की है। इसे एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज और नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज में बांटा गया है। शराब का सेवन नहीं करने वाले मनुष्य में मोटापा, असमय व गलत खानपान, मधुमेह, तनाव व ट्राइग्लिसराइड का बढ़ता स्तर फैटी लिवर होने के प्रमुख कारण हैं।
पेट की दाईं तरफ उपरी हिस्से में दर्द, परिपूर्णता का आभास, भोजन का देर से पचना, भूख न लगना, वजन घटना, थकावट आदि फैटी लिवर के लक्षण हो सकते हैं। मगर राहत की बात ये है कि हम खानपान व जीवनशैली में परिवर्तन लाकर और आयुर्वेदिक औषद्धियों का सहारा लेकर इस बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं।
डॉ. पूजा मजोतरा ने बताया कि अल्ट्रासाउंड और लिवर मार्कर टेस्ट में किसी भी किस्म की गडबड़ी आसानी से पकड़ में आ जाती है। इसके अनुसार मरीज का उपचार किया जाता है। फैटी लिवर के मरीज अपनी शुगर व चर्बी पर नियंत्रण, लो फैट डाइट, वजन पर नियंत्रण, शराब, जंक फूड, मैदे के पदार्थ, डिब्बा बंद खाद्य सामग्री व चीनी से परहेज रखने के साथ नियमित व्यायाम और सही उपचार से बीमारी पर काबू पा सकते हैं।