धनपत राय बत्रा के मरणोपरांत बेटियों ने बेटे का फर्ज निभाते हुए दिवंगत पिता को कंधा देते हुए श्मशान गृह में जाकर अंतिम संस्कार में भाग लिया।
करीब 62 वर्षीय विवेक नगर निवासी धनपत राय बत्रा का मंगलवार सुबह स्वर्गवास हो गया। उनकी अंतिम इच्छानुसार उनका नेत्रदान कराया गया।
हनुमान मंदिर नागोरी गेट की मार्केट में गारमेंट्स का काम करने वाले दिवंगत धनपत राय बत्रा की दो पुत्रियां हैं। उनकी बड़ी बेटी कंचन और छोटी बेटी वैशाली दोनों हिसार में ही विवाहिता हैं।
दोनों बहनों ने भाई न होने का फर्ज निभाते हुए पिता की शवयात्रा को कंधा देकर समाज को संदेश दिया कि वे बेटों के बराबर हैं। स्वर्गीय धनपत राय बत्रा के समधी और वैशाली के ससुर बंसीलाल पठनेजा ने बताया कि दोनों बेटियों ने बेटा-बेटी एक समान का फर्ज निभाकर अनुकरणीय कार्य किया है।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत समाज में बेटियां लगातार आगे आ रही हैं, जिसमें हिसार के पेटवाड़ की सुमन ने ट्रैक्टर का लाइसेंस बनवाकर नई मिसाल प्रस्तुत की थी।