प्रदेश में धान उत्पादक किसानों का रुझान अब एक्स-सी-टू उपकरणों की ओर बढ़ रहा है। ये वो उपकरण हैं, जिनकी मदद से पराली से ईंधन ब्लाक तैयार होते हैं। बहुत कम ही किसान हैं, जो अब इन-सी-टू (वे उपकरण जिनसे पराली के अवशेष को खेतों में सड़ने के लिए जमींदोज किया जाता है) उपकरणों का इस्तेमाल पराली प्रबंधन के लिए कर रहे हैं। ऐसे उपकरणों से किसान को कोई खास आय नहीं होती। जबकि पराली के अवशेष जमीन में सड़ने में भी काफी समय लग जाता है। इसलिए किसान एक्स-सी-टू उपकरणों के इस्तेमाल की ओर बढ़ रहे हैं।
प्रदेश सरकार भी अब एक्स-सी-टू उपकरणों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। इससे किसानों की भी आय बढ़ती है और साथ ही इंडस्ट्री की भी जरूरतें पूरी होती हैं। प्रदेश के करीब 15 जिलों में काफी किसान अपनी पराली अवशेष से ईंधन ब्लाक बनाकर उसे शुगर मिलों, गत्ता व पेपर मिलों समेत पैकेजिंग इकाइयों को उपलब्ध करवा रहे हैं। हरियाणा सरकार और कृषि विभाग के अफसरों के प्रयासों से ये अभी शुरुआत है लेकिन जल्द ऐसे जागरूक किसानों के लिए पराली अवशेष से होने वाली आय भी उनकी धान से होने वाली आमदनी में जोड़ी जाने लगेगी। - डॉ. गिरीश नागपाल, उप निदेशक, हरियाणा कृषि विभाग।