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विदेशों से आलू आया तो किसान हो जाएंगे बर्बाद

Fri, 31 Oct 2014 12:06 AM IST
अमर उजाला/ ब्यूरो, कुरुक्षेत्र
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लाडवा। केंद्र सरकार का आलू आयात का फैसला किसानों पर भारी पड़ सकता है। भाकियू ने केंद्र सरकार के इस फैसले पर चिंता जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख आलू का आयात रोकने की मांग की है।
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भाकियू का कहना है कि जिन दिनों में विदेशों से देश में आलू पहुंचेगा, उस समय तो देश में ही आलू की बंपर फसल हो जाती है।

इससे आम आदमी को फायदा पहुंचे या न पहुंचे, लेकिन किसानों का भारी नुकसान होगा। वहीं भाकियू ने गेहूं के समर्थन मूल्य में 50 और चने के समर्थन मूल्य में 75 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि किसानों के साथ मजाक बताई है।

भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश प्रवक्ता राकेश कुमार ने बताया कि उन्होंने पीएम मोदी को लिखा है कि केंद्र सरकार ने विदेशों से आलू आयात की योजना बनाई है, जिसके तहत जनवरी, फरवरी माह में विदेशों से आलू भारत पहुंचेगा।
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उन्होंने कहा कि भारत के कई राज्य ऐसे हैं, जहां एक दिसंबर से मई तक आलू की बंपर फसल होती है। कई बार तो इस फसल के कारण आलू का मूल्य इतना कम हो जाता है कि कोई खरीददार नहीं मिलता है।

इस कारण किसानों को मजबूरन फसल सड़कों पर ही फेंकनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि ऐसे में जनवरी व फरवरी में अगर विदेशों से आयात कर आलू देश में मंगवा लिया तो वह किसानों पर भारी पड़ेगा और किसानों को उनकी फसल के उचित दाम नहीं मिल पाएंगे।

उन्होंने कहा कि किसान पहले ही आर्थिक संकट से गुजर रहा है, ऐसे में जब उसको आलू की फसल में भी नुकसान उठाना पड़ा तो स्थिति बद से बदतर हो जाएगी और किसानों पर आर्थिक संकट और ज्यादा गहरा जाएगा।

उन्होंने किसानों की स्थिति को देखते हुए पीएम से मांग की है कि सरकार विदेशों से आलू का आयात न करें और अपने इस फैसले पर किसान हित में दोबारा विचार कर आयात पर रोक लगाएं।

उन्होंने कहा कि जिन दिनों में आलू के दाम आसमान छूते हैं और व्यापारी खुलेआम कालाबाजारी कर मोटा मुनाफा कमाते हैं, उन दिनों में ही आलू का आयात होना चाहिए।

इससे न केवल कीमतें घटेंगी, बल्कि कालाबाजारी पर भी रोक लगेगी। उन्होंने कहा कि जब देश के किसानों की आलू की फसल बाजार में आ जाए तो उस समय आलू का आयात पूरी तरह से किसानों की कमर तोड़ने का काम करेगा।

इससे किसान बेहाल और व्यापारी मालामाल होंगे। वहीं उन्होंने कहा कि चुनाव के समय भाजपा ने किसानों से वादा किया था कि भाजपा की सरकार बनने पर स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू की जाएगी, लेकिन वह इस वादे को सरकार भूल गई है। उन्होंने गेहूं के समर्थन मूल्य में 50 रुपये और चने के समर्थन मूल्य में 75 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि को किसानों के साथ मजाक बताया है और कहा है कि सरकार अपना वादा निभाए अन्यथा किसानों को सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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