चंडीगढ़। किसानों के सुझाव पर मान सरकार ने लैंड पूलिंग पॉलिसी में जरूरी संशोधन किए हैं। जमीन के बदले रिहायशी और व्यवसायिक प्लाॅट डेवलप करके देने तक अब सरकार किसानों को सालाना एक लाख रुपये मुआवजा देगी। जब तक प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो जाता इस मुआवजा राशि में सालाना 10 फीसदी की वृद्धि भी की जाएगी। इसके साथ ही लैंड पूलिंग पॉलिसी में शामिल होने पर किसान को 21 दिनों में लेटर ऑफ इंटेंट दे दिया जाएगा। लेटर ऑफ इंटेंट पर किसान अपनी जमीन पर लिमिट यानी ऋण भी ले सकेंगे। नीति में शामिल होते ही किसान को सरकार 50 हजार रुपये का चेक सौंपेगी। इसके अलावा जो किसान अपनी जमीन के बदले रिहायशी प्लाॅट के साथ व्यावसायिक प्लाॅट नहीं लेना चाहेगा, वह रिहायशी प्लॉट में तीन गुना तक इजाफा करा सकते हैं। लैंड पूलिंग पॉलिसी में इन जरूरी संशोधन को सीएम भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में मंगलवार को चंडीगढ़ स्थित सरकार आवास पर हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी गई।
सीएम मान ने बताया कि विपक्षी दल किसानों में यह अफवाह फैला रहे हैं कि इस नीति में जिस जिला, कस्बा या हलके के लोग शामिल होंगे, वहां सरकार रजिस्ट्री बंद कर देगी। ऐसा बिलकुल भी नहीं होगा क्योंकि यह जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया नहीं है। लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत जमीनों की रजिस्ट्री बंद नहीं होगी। सीएम ने कहा कि जब सरकार किसान से जमीन का कब्जा लेगी, उसके बाद ही नोटिफिकेशन जारी होगा। इस संशोधित नीति के तहत भूमि मालिकों को अब एक कनाल अधिग्रहित की गई भूमि के बदले 125 वर्ग गज का प्लॉट और 25 गज व्यावसायिक भूमि मिलेगी।
किसान को मिलने वाली जमीन पर सड़क सरकार बनाएगी
सीएम मान ने बताया कि 50 एकड़ या उससे अधिक भूमि की लैंड पूलिंग के मामलों में एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्जेज़ (ईडीसी) के अलावा कोई और खर्च नहीं लिया जाएगा। 50 एकड़ से ज्यादा जमीन देने पर सरकार किसान को मिलने वाली जमीन पर सड़क बनाकर देगी। इसके अलावा भूमि मालिकों को व्यावसायिक जगह न लेने की स्थिति में बदले में व्यावसायिक जगह से तीन गुना अधिक आवासीय स्थान मिलेगा। यानि एक एकड़ जमीन देने वाले किसान को अगर 200 गज का कमर्शियल प्लाॅट नहीं चाहिये तो उसके बदले 600 गज रिहायशी प्लाॅट भी ले सकता है। ऐसा करने पर किसान को एक एकड़ के बदले अर्बन इस्टेट में 1600 गज रिहायशी प्लाॅट मिल जाएगा।