किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए पंजाब सरकार द्वारा उठाए जा रहे विभिन्न कदमों के बावजूद सूबे के किसान खेतों में पराली को आग लगाने से बाज नहीं आ रहे। सोमवार को उन्हें पराली जलाने को लेकर एक किसान संगठन का खुला समर्थन भी मिल गया। भारतीय किसान यूनियन (कादियां) ने पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ पुलिस एक्शन का कड़ा विरोध करने की चेतावनी दी है और इसके साथ ही प्रस्तावित 2500 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा रकम देने का मुद्दा भी उठाया है।
इस बीच, रविवार तक प्रदेश के विभिन्न जिलों में पराली को आग लगाने के 711 मामले दर्ज किए गए हैं। पंजाब रिमोट सेंसिंग अथॉरिटी के आंकड़ों के अनुसार, मालवा क्षेत्र के किसान भी अब अपने खेतों में पराली के निपटारे के लिए आग लगाने लगे हैं। अब तक पराली जलाने के मामले सीमावर्ती जिलों के अलावा बठिंडा, फाजिल्का, होशियारपुर, रोपड़ व पठानकोट में सामने आ रहे थे लेकिन लुधियाना समेत मालवा के इलाकों में किसानों ने खेतों में पराली जलाना शुरू कर दिया है। कृषि विभाग के अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगले दो हफ्तों में धान की फसल मंडियों में पहुंच जाने के बाद माझा और मालवा के क्षेत्रों में किसान पराली जलाना शुरू कर देंगे।
दूसरी ओर, पराली जलाने वाले किसानों के समर्थन में किसान संगठन आगे आने लगे हैं। बीकेयू (कादियां) के हरमीत सिंह कादियां ने कहा है कि केंद्र और राज्य की सरकारें किसानों को पराली प्रबंधन के लिए नकद प्रोत्साहन राशि देने के अपने वादे से मुकर गई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की गई तो संगठन उसका कड़ा विरोध करेगा। कादियां ने पराली जला रहे किसानों का पक्ष लेते हुए कहा कि खराब मौसम के कारण किसानों ने फसलों की कटाई स्थगित कर दी है। इस वजह से अब किसानों के पास रबी फसल के लिए खेत तैयार करने को बहुत कम समय बचा है।
भाकियू (राजेवाल) के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल ने भी पराली जलाने के सही ठहराते हुए कहा है कि एक दशक पहले तक पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) अपनी वार्षिक पुस्तक ‘पैकेज एंड प्रैक्टिस’ में, खेतों में आग लगाने की सिफारिश किया करता था। जब किसान खेती के पुराने तरीके को अपना चुके हैं तो पराली प्रबंधन के नए तरीके सीखने में उन्हें समय लगेगा।