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Stubble Burning: पंजाब में बदल रही किसानों की सोच, अब कंपनियों को पराली बेच कमाई करने लगे

Tue, 11 Oct 2022 08:37 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

अवतार सिंह के पास रैक और ट्रैक्टर ट्रॉली के अलावा दो बेलर हैं। गौरतलब है कि दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में अक्तूबर और नवंबर में वायु प्रदूषण के स्तर में खतरनाक वृद्धि के पीछे पंजाब और हरियाणा में धान की पराली जलाना एक मुख्य कारण है। चूंकि धान की कटाई के बाद गेहूं के लिए समय बहुत कम होता है, इसलिए किसान पराली को जल्द हटाने के लिए अपने खेतों में आग लगा देते हैं। 
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पराली - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पंजाब में पर्यावरण के लिए सबसे बड़ी समस्या बन चुकी धान की पराली के प्रबंधन से राज्य की तस्वीर बदलने लगी है। हालांकि राज्य को अभी इस समस्या से पूरी तरह निजात नहीं मिल सकी है लेकिन प्रदेश के जागरूक किसानों ने पराली को न जलाकर इसका वैकल्पिक इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।

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पर्यावरण पर इसके बुरे प्रभावों को देखते हुए 100 एकड़ से अधिक भूमि पर फसल उगाने वाले किसान अमरजीत सिंह पराली को जलाने के बजाय इसे समीप के एक कारखाने को बेच रहे हैं जो इसे ईंधन में बदल देता है। वह कुछ अन्य किसानों के साथ पर्यावरण को प्रदूषित करने से रोकने के लिए हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, हल, मल्चर आदि जैसी मशीनें देते हैं।

मोहाली के गांव थेरी के अवतार सिंह तीन अन्य किसानों के साथ बेलर की मदद से धान का प्रबंधन कर रहे हैं। इलाके के लगभग 500 उत्पादक इस मशीन से 2,000 टन फसल के अवशेष का प्रबंधन कर रहे हैं। वहीं, प्रगतिशील किसान अवतार सिंह चार जिलों फतेहगढ़ साहिब, मोहाली, रूपनगर और मोगा में किसानों के खेतों से पराली इकट्ठा करते हैं। 
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अवतार सिंह ने बताया कि वह पराली को डेराबस्सी में एक धागा कारखाने और फिरोजपुर में एक बिजली उत्पादक कंपनी को बेच रहे हैं, जिससे उन्हें लाभ हो रहा है। अवतार सिंह पहले 75 एकड़ जमीन पर खेती करते थे लेकिन बाद में उन्होंने अन्य किसानों की पराली के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए खेती के तहत क्षेत्र को घटाकर 25 एकड़ कर दिया। 

अवतार सिंह के पास रैक और ट्रैक्टर ट्रॉली के अलावा दो बेलर हैं। गौरतलब है कि दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में अक्तूबर और नवंबर में वायु प्रदूषण के स्तर में खतरनाक वृद्धि के पीछे पंजाब और हरियाणा में धान की पराली जलाना एक मुख्य कारण है। चूंकि धान की कटाई के बाद गेहूं के लिए समय बहुत कम होता है, इसलिए किसान पराली को जल्द हटाने के लिए अपने खेतों में आग लगा देते हैं। 

आंकड़े बताते हैं कि पंजाब सालाना लगभग 180 लाख टन पराली पैदा करता है। पिछले कई वर्षों से पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए कई उपाय करने के बावजूद पंजाब में अब भी खेतों में आग की घटनाएं जारी हैं। जानकारी के मुताबिक सूबे में साल 2021 में 71,304, 2020 में 76,590, 2019 में 55,210 और 2018 में 50,590 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज हुई हैं। संगरूर, मानसा, बठिंडा और अमृतसर सहित कई जिलों में बड़ी संख्या में पराली जलाने की घटनाएं देखी गईं हैं। 

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