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पंजाब: संगरूर में लावारिस पशु डीसी दफ्तर छोड़ने पहुंचे किसान, बठिंडा में हाईवे किया जाम

Mon, 16 Mar 2020 06:52 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, संगरूर/बठिंडा ( पंजाब)
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नारेबाजी करते किसान। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां की अगुवाई में सोमवार को किसान लावारिस पशुओं को ट्रालियों में लेकर जिला प्रबंधकीय कांप्लेक्स स्थित डीसी दफ्तर छोड़ने पहुंचे। किसानों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। 

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प्रदर्शनकारी किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से लावारिस पशुओं का कोई समाधान नहीं किया जा रहा है। लावारिस पशु किसानों की फसल तबाह कर रहे हैं। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान सहना पड़ रहा है। किसान नेता जरनैल सिंह चंगाल ने कहा कि इन लावारिस पशुओं के कारण किसानों की रातों की नींद खराब हो गई है। किसान अपनी फसल बचाने के लिए रात को चौकीदारी करने को मजबूर हैं। 

उन्होंने कहा कि शहरों की गौशालाओं की ओर से लावारिस पशुओं की संभाल नहीं की जा रही। टेंपो में भर-भरकर गांवों में छोड़ दिया जाता है। इसके अलावा न ही प्रशासन की ओर से इनकी संभाल की जा रही है। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते लौंगोवाल के नायब तहसीलदार को इस संबंधी कार्रवाई करने के लिए कहा। बताया गया किसानों की ओर से लाए गए लावारिस पशुओं को झनेड़ी की गौशाला में छोड़ा जाएगा। पशुओं के चारे का प्रबंध किसानों की ओर से किया जाएगा।

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बठिंडा: किसानों ने बठिंडा-मानसा हाईवे किया जाम 

हाईवे किया जाम। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सूबे में नकली बीज व्यापारियों पर कार्रवाई करवाने को लेकर सोमवार को किसानों ने भारतीय किसान एकता सिदूपुर यूनियन के बैनर तले बठिंडा-मानसा हाईवे जाम कर दिया। किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। जाम लगने की सूचना मिलते ही बड़ी तादाद में पुलिस फोर्स पहुंची। जाम के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।

भारतीय किसान एकता सिद्धूपुर यूनियन के नेता महमा सिंह और जोधा सिंह ने कहा कि सूबे में काफी समय से नकली बीज विक्रेता धड़ल्ले से नकली बीज बेच रहे हैं। इस कारण किसानों को आर्थिक तौर पर बड़ा नुकसान हो रहा है। इस बाबत किसानों ने प्रशासन और सरकार को भी बताया लेकिन किसानों की सुनवाई नहीं हो रही है। 

किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की मिली भगत से ही व्यापारी नकली बीज सप्लाई कर रहे हैं। अब पंजाब को किसानों के आत्महत्या के लिए जाना जाता जबकि पहले पंजाब के किसानों को अन्न देवता के नाम से जाना जाता था। 
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