बढ़ रही महंगाई से लोगों की आर्थिक हालत कमजोर हो गई है। चुनाव से पहले बड़े-बड़े वादे करने वाले सियासी दल, सत्ता पर काबिज होते ही सभी वादे भूल जाते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की कैप्टन सरकार ने भी सत्ता में आने से पहले किसानों का सारा कर्ज माफ करने का वादा किया था। लेकिन सरकार बनाने के बाद सब कुछ भूला दिया। उन्होंने एलान किया कि किसान एक जून से धान की बिजाई शुरू करेंगे।
देश में बेरोजगारी बेतहाशा बढ़ चुकी है। जिस कारण पढ़े लिखे नौजवान सड़कों की खाक छान रहे हैं। कारपोरेट घरानों का बड़ा कर्ज माफ किया जा रहा है। लेकिन किसान-मजदूरों के बारे में कुछ सोचा नहीं जा रहा। उन्होंने मांग की कि सार्वजनिक अदारें जीवित रखे जाएं। आवारा पशुओं की समस्या का समाधान किया जाए।
खेतों में बिजली के खराब ट्रांसफार्मरों को तुरंत बदला जाए, आग लगने के कारण किसानों की फसलों के हुए नुकसान का प्रति किला पचास हजार रुपये दिया जाए। इस मौके पर यूनियन के जिलाध्यक्ष अमरीक सिंह गंढूआं, जिला महासचिव दरबारा सिंह छाजला, सोमा सिंह तोलावाल, जनक सिंह भुटाल कलां, कृपाल सिंह धूरी, अजैब सिंह जखेपल, जसवंत सिंह तोलावाल, हरजिंदर सिंह तेजिंदर सिंह गुरजिंदर सिंह रमेश पाल सहित बड़ी तादाद में किसान मौजूद रहे।
बरनाला में भी किसानों का प्रदर्शन
बरनाला में भी पंजाब सरकार की 13 जून से धान की बिजाई को लेकर बनाई गई पॉलिसी से नाराज किसानों के सात संगठनों ने जिला प्रबंधकीय परिसर में धरना लगाकर राज्य सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया।
किसानों ने अपना रोष जताते हुए कहा कि पिछले साल भी धान की बिजाई 20 जून को की गई थी, जिससे पहले उन्हें मंहगी लेबर की मदद से बिजाई करनी पड़ी। बिजाई के बाद फसल पकी तो उसमें एक माह की देरी के कारण कटाई भी देरी से करनी पड़ी, जिसके कारण फसल में नमी की मात्रा बढ़ने लगी।
वहीं नवंबर में हुई बारिश के कारण उन्हें अपनी फसल को बेचने में परेशानियों को सामना करना पड़ा, क्योंकि नमी के कारण खरीद एजेंसियों ने फसल की खरीद नहीं की। प्रदर्शन में भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां व एकता डकौंदा के नेतृत्व में सात किसान संगठनों कृति किसान यूनियन के प्रदेश प्रधान निभय सिंह, क्रांतिकारी भाकियू के प्रदेश प्रधान सुरजीत सिंह फूल, किसान संघर्ष कमेटी पंजाब के प्रदेश प्रधान कमलप्रीत सिंह पन्नू, क्रांतिकारी भाकियू पंजाब के प्रदेश प्रधान अवतार सिंह व किसान संघर्ष कमेटी आजाद के प्रदेश प्रधान हरजिदर सिंह टांडा के आह्वान पर किसान पहुंचे।