पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित किया और विरोध के बीच मुख्यमंत्री और उनके काफिले को बाहर निकाला। सीएम काफिले में विधायक असीम गोयल की गाड़ी भी शामिल थी, जिस पर किसानों ने डंडे फेंके। भाजपाइयों के साथ-साथ काफिले में शामिल पुलिस की गाड़ियों और जैमर को भी निशाना बनाने का प्रयास किया गया। यह स्थिति तब हुई जबकि पहले से ही मौके पर खुद डीसी अशोक कुमार रणनीति बनाने में जुटे थे। उन्होंने तैयारी की थी कि किसानों को पुराने पुल पर ही रोककर सीएम मनोहर लाल के काफिले को नए पुल से निकाल दिया जाए जिसे किसानों ने फेल कर दिया।
एसपी कालिया से भी धक्कामुक्की
एसपी राजेश कालिया को भी प्रदर्शनकारियों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। मौके पर तैनात एसपी ने जब उत्तेजित भीड़ को रोकने का प्रयास किया तो किसानों ने उनके साथ भी धक्कामुक्की कर दी। सीएम काफिले के निकलने के बाद किसान वापस अनाज मंडी में पहुंचे, जहां पहले सारी रणनीति बनाई गई थी। आधा-घंटे चले ड्रामे के दौरान यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चौपट रही, हालांकि प्रदर्शनकारी किसानों ने इस दौरान पुल के ऊपर से आ रही बाइक और अन्य वाहनों पर सवार महिलाओं को नहीं रोका।
मर्यादा में सभी को बात कहने का हक
लोकतंत्र में अपनी बात कहने का हक सभी को है लेकिन दूसरे के कार्यक्रम में खलल डालना लोकतंत्र की मर्यादा के खिलाफ है। - ओम प्रकाश धनखड़ प्रदेश अध्यक्ष भाजपा।