खेती अध्यादेशों के विरोध में शुक्रवार को पातड़ां में क्रांतिकारी किसान यूनियन के प्रदेश प्रधान डॉ. दर्शन पाल की अगुवाई में पीएम का पुतला फूंककर प्रदर्शन किया गया। इस दौरान मांग की गई कि पंजाब से संबंधित सांसद इस्तीफे देकर वापस लौटें। केंद्र सरकार ने हमेशा पंजाब के साथ सौतेला व्यवहार किया है। अब यह कानून बनाकर किसानों के साथ अत्याचार किया जा रहा है। मौके पर अकाली दल से भी भाजपा के साथ अपने सालों पुराने गठबंधन को तोड़ने की मांग की गई।
किसान नेता डॉ. दर्शन पाल ने किसानों से आह्वान किया कि इन कानूनों के विरोध में गांव-गांव और हर जगह पर मोदी सरकार के खिलाफ रोष जताया जाए। 24 सितंबर तक यह कार्यक्रम करने के बाद 25 सितंबर को पूरे पंजाब में मुकम्मल बंद रखा जाएगा। इस दिन पंजाब में सड़क व रेल आवाजाही ठप रखी जाएगी। सारे ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में मुकम्मल बंद लागू करते हुए सेवाएं, व्यापार, दफ्तर, दुकानों व हर किस्म का कारोबार बंद रखा जाएगा।
बठिंडा: ‘हरसिमरत ने वोटों की खेती करने को दिया इस्तीफा’
केंद्र सरकार के कृषि अध्यादेशों के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले बठिंडा में मिनी सचिवालय के समीप धरना शुक्रवार को भी जारी रहा। किसानों ने केंद्र सरकार की अर्थी फूंककर अध्यादेशों को खारिज करने की मांग उठाई। किसान नेता शिंगारा सिंह मान, गुरदेव सिंह, सुखदेव सिंह ने कहा कि कृषि अध्यादेश किसानों के लिए लाभदायक है तो केंद्र एवं राज्य सरकार किसानों को इनके बारे में स्पष्ट क्यों नहीं करती। उन्होंने कहा कि अध्यादेशों से किसानों को बडे़ स्तर पर आर्थिक नुकसान होगा। केंद्र सरकार इस बारे में किसानों की बात तक सुनने को तैयार नहीं है।
किसानों ने कहा कि अकाली दल प्रदेश में अपनी लोकप्रियता खो चुका है। केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने पंजाब में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए वोटों की खेती करने के मकसद से अपने पद से इस्तीफा दिया है। उन्होंने कहा कि अगर अकाली दल किसानों के हितों के लिए लड़ता तो सांसद सुखबीर बादल यह एलान कभी न करते कि भाजपा को समर्थन जारी रहेगा। किसानों ने कहा कि हरसिमरत कौर बादल का इस्तीफा राजनीतिक ड्रामा है। इसके बारे में आने वाले कुछ दिनों में खुलासा हो जाएगा।