वहीं भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढू़नी ने कहा कि तीनों कानून देश की गुलामी के वारंट हैं। खेती के डेथ वारंट हैं। इससे मंडियां 100 प्रतिशत खत्म होंगी, इससे एमएसपी 100 प्रतिशत खत्म होगा और देश में चंद लोगों का जो ढांचा खड़ा होने जा रहा है, वे पूरे देश का आटा, दाल, खाद्य तेल, आलू, प्याज स्टॉक करेंगे।
चंद व्यापारी पूरे देश का माल खरीदेंगे और फिर पूरा देश उनसे मोल लेकर खाएगा, यानी पूरा देश उनका ग्राहक होगा। छोटे व्यापारी खत्म होंगे, आढ़ती खत्म होंगे, खेती तबाह होगी। चढू़नी ने कहा कि लोग कॉन्ट्रेक्ट फॉर्मिंग की बात करते हैं। गुजरात के किसानों ने कॉन्ट्रेक्ट फॉर्मिंग से आलू बोया, सारा आलू तो कंपनी को दे दिया लेकिन अगले साल के लिए बीज रख लिया। चार करोड़ का मुकदमा उन पर दर्ज किया गया। यानी पूरी तरह कंपनियों का गुलाम बनाया जा रहा है।
बैठक में पंजाब से रमनदीप मान, राजस्थान से किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल, मध्यप्रदेश से किसान संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष सुनीलम, उत्तर प्रदेश से भाकियू लोकतांत्रित के प्रदेशाध्यक्ष राकेश चौहान, दिल्ली से किसान कामगार महासभा संयोजक विरेंद्र सिंह, मध्य प्रदेश से किसान जागृति संगठन के महासचिव राजकुमार, किसान सेल प्रधान सिरसा गुरदास सिंह, जसबीर सिंह भाटी सिरसा, राजकुमार महासचिव, किसान जागृति संगठन, सुरेंद्र सिंह, अशोक दनौदा, भाकियू के युवा प्रधान अमरीक सिंह ढांसा, अखिल भारतीय किसान के राज्य अध्यक्ष गुरभजन सिंह, संदीप गिडे पुणे, उत्तर प्रदेश से किसान अधिकार आंदोलन के संयोजक नरेंद्र राणा मौजूद रहे।