कृर्षि से जुड़े तीन विधेयक पास होने के बाद उठे बवाल पर बेशक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय खेती मंत्री नरेंद्र तोमर आश्वासन दे रहे हैं कि केंद्र सरकार एमएसपी खत्म नहीं करेगी। गेहूं व धान पर एमएसपी जारी रहेगी, लेकिन किसानों का तर्क है कि गेहूं व धान का हाल मक्की व कपास जैसा होगा। उनका तर्क है कि दोनों फसलों पर एमएसपी तय है फिर भी किसानों से कम दाम पर खरीद की जा रही है।
अगर मक्की का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1835 रुपये है, लेकिन मार्केट में 600 रुपये पर खरीद हो रही है। कपास की एमएसपी अगर 5500 रुपये है तो मार्केट में 4500 रुपये के आसपास खरीद हो रही है। किसानों का कहना है कि केंद्र सरकार के अनुसार एमएसपी गेहूं व धान पर जारी रहेगा, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, मार्केट में दोनों फसलों के दाम व्यापारियों की मर्जी से तय होंगे। सूबे में मक्की की खेती 60 हजार हेक्टेयर में की जाती है, जबकि कपास मालवा की प्रमुख फसल है।
किसान बलवंत सिंह का कहना है कि मार्केट में मक्की व कपास का हाल देखकर दिल घबराता है। सरकार ने एमएसपी तो तय कर रखी है, लेकिन मोदी सरकार को जमीनी स्तर पर देखना चाहिये कि क्या मक्की और कपास की फसल एमएसपी पर खरीदी जा रही है? फिर किसान कैसे विश्वास करेगा कि गेहूं व धान की फसल का हाल मक्की व कपास जैसा नहीं होगा?
मूलेवाल अराइया के रहने वाले किसान गुरचरण सिंह का कहना है कि व्यापारी तो किसान का हमदर्द नहीं होगा, उसकी प्राथमिकता व्यापार होगा। पिछले साल जैसे कपास की एमएसपी 5000 रुपये तक पहुंच गई थी, लेकिन बाद में व्यापारियों ने काफी कम दाम पर कपास यह कहकर खरीदी कि फसल सही नहीं है।
व्यापारी कभी घाटा नहीं खाता और व्यापारी हमेशा एमएसपी से कम पर फसल खरीदने की कोशिश करता है। सरकार गेहूं व धान में प्राइवेट सेक्टर को ला रही है, क्या वह किसानों के साथ हमदर्दी करेंगे? वह गेहूं व धान का हाल मक्की व कपास जैसा ही करेंगे।