अमृतसर के किसान जीत सिंह ने बताया कि किसान अपनी इच्छा से पराली नहीं जलाते। उन्हें पता है कि इससे लोगों को परेशानी होती है। लेकिन पराली जलाना हमारी मजबूरी है। सरकार इसका कोई समाधान उपलब्ध नहीं कराती। हमने प्रशासन से कहा कि वे इसके खत्मे का प्रबंध कराएं, लेकिन कोई ध्यान ही नहीं देता। न ही वे कोई कार्रवाई करते हैं। इसलिए फसल काटने के 10 दिन बाद हम इसे जला देते हैं, ताकि अगली फसल के लिए खेत तैयार किए जा सकें।