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किसान आंदोलन : केंद्र संग नहीं बनी बात तो नए साल के लिए नई रणनीति के साथ तैयार हैं किसान

Tue, 29 Dec 2020 12:10 PM IST
निवेदिता वर्मा अमर उजाला, चंडीगढ़
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केंद्र सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे किसान। - फोटो : फाइल फोटो
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कृषि कानूनों पर सरकार और किसानों के बीच बना गतिरोध समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा। किसान संगठनों और सरकार के बीच एक जनवरी से पहले सातवें दौर की बैठक होगी। केंद्र सरकार को उम्मीद है कि इस बैठक में बीच का रास्ता जरूर निकलेगा और आंदोलन खत्म हो जाएगा। मगर ऐसा नहीं होता तो किसान अपने आंदोलन को और तेज करने की रणनीति बनाएंगे। 

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आंदोलनरत किसान संगठनों ने नए साल पर दिल्ली की सीमाओं पर अपनी तादाद और बढ़ाने की तैयारियां शुरू कर दी है। इसके लिए हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों में मौजूदा किसान संगठनों के सक्रिय सदस्यों को निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे अपने-अपने इलाकों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में किसानों, युवाओं और आमजन को एक जनवरी को दिल्ली कूच के लिए तैयार करें।

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किसान संगठनों ने आह्वान किया है कि यदि सरकार से वार्ता सिरे नहीं चढ़ती तो एक जनवरी को आम लोग भी दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचकर वहां बैठे किसानों के धरने में शामिल हों। ताकि किसानों के आंदोलन को और मजबूती मिले। 

राष्ट्रीय किसान महासंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिमन्यु कोहाड़ ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं को भी उम्मीद है कि सातवें दौर की बैठक में सरकार उनकी मांगों को जरूर मानेगी और गतिरोध को खत्म करने के लिए बड़ा फैसला भी लेगी। अगर ऐसा नहीं होता तो किसान आंदोलन को तेज करने का फैसला लेंगे। एक जनवरी को दिल्ली सीमाओं पर चल रहे धरने-प्रदर्शन में किसानों व आमजन की संख्या और बढ़ाने की तैयारी की गई है।

कोहाड़ ने बताया कि किसान संगठन पहले ही दिन से अपने एजेंडे को लेकर स्पष्ट हैं। बस, अब देखना यह है कि बैठक में सरकार का रूख किसानों की मांगे स्वीकार करते हुए आंदोलन खत्म करने के प्रति कैसा रहता है। 

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इन मुद्दों पर अड़े हैं किसान 

किसान संगठन आज भी मुख्य रूप से अपने चार मुद्दों पर अड़े हुए हैं। इनमें तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग, सभी किसानों और कृषि वस्तुओं के लिए राष्ट्रीय किसान आयोग द्वारा सुझाए लाभदायक एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी देने की प्रक्रिया और प्रावधान करने की मांग, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अध्यादेश, 2020 में ऐसे संशोधन जो अध्यादेश के दंड प्रावधानों से किसानों को बाहर करने के लिए जरूरी हैं किए जाने की मांग व किसानों के हितों की रक्षा के लिए विद्युत संशोधन विधेयक 2020 के मसौदे में जरूरी बदलाव की मांग शामिल हैं। किसान नेताओं का कहना है कि वे इन चारों मुद्दों पर खुले मन से वार्ता करने के लिए तैयार है। मगर सरकार का रवैया भी सकारात्मक होना चाहिए।

हरियाणा सरकार ने भी तेज किए प्रयास
दिल्ली सीमाओं पर बैठे आंदोलनरत किसानों को  समझाने के लिए प्रदेश सरकार ने भी अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। विभिन्न माध्यमों खासकर सोशल मीडिया के जरिए सरकार किसानों को यह समझाने में जुटी हुई है कि आखिरकार यह कृषि कानून उनके लिए किस तरह फायदेमंद साबित होंगे। प्रदेश सरकार किसानों
को बता रही है कि आज विपक्षी दल उन्हें इस मसले पर भ्रमित किए हुए हैं। मगर वे आश्वस्त रहें कि जो आशंकाएं उनके मन में हैं, उन्हें सरकार खुले मन से वार्ता में दूर करेगी और उनके भावी कल्याण को भी सुनिश्चित करेगी। किसानों को यह भी बताया जा रहा है कि वे लोग देश के अन्नदाता है और उनका सर्वांगीण विकास केंद्र व राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। इसलिए वे आश्वस्त रहें कि उन्हें इन बिलों से नुकसान नहीं होगा।
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