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Farmer Protest: किसान आंदोलन के चलते अकाली दल फिर बैकफुट पर, BJP से समझौते की तैयारी थी; सीटें हो गई थीं फाइनल

Thu, 15 Feb 2024 08:22 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, जालंधर

सार

किसान आंदोलन के चलते अकाली दल फिर बैकफुट पर आ गया है। इससे पहले भाजपा से समझौते की तैयारी लगभग पूरी हो गई थी। सीटों की बात फाइनल हो चुकी थी। बसपा ने भी मंगलवार को समझौता तोड़ा था। 
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PTI (File Photo)
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विस्तार
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2020 में कृषि कानून को लेकर पंजाब में मचे हंगामे और लोगों के गुस्से को देखकर अकाली दल ने भाजपा से नाता तोड़ लिया था। करीब 4 साल बाद फिर से अकाली दल भाजपा के बीच दूरियां कम चुकी थी और दोनों में आगामी दिनों में होने वाले समझौते को लेकर पूरी रूपरेखा अंतिम चरण में थी कि फिर से किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। 
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अकाली दल को जहां अपनी पंजाब बचाओ यात्रा को रोकना पड़ा है, वहीं भाजपा के साथ समझौते को लेकर चुप्पी भी साधनी पड़ी है। हालांकि चंद दिन पहले ही केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा था कि अकाली दल के साथ समझौते पर बातचीत चल रही है। 

बसपा ने भी मंगलवार को अकाली दल से समझौता तोड़ दिया था, क्योंकि अकाली दल व भाजपा समझौते पर औपचारिक मुहर लगनी ही बाकी रह गई थी कि किसानों का आंदोलन शुरू हो गया है।
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हरियाणा में भाजपा की सरकार है, वहां पर जिस तरह से पंजाब के किसानों पर आंसूगैस के गोले बरसाये गए और सड़कों पर कील लगा दिए गए, उससे पंजाब में भारी रोष फैलता जा रहा है। हालांकि किसान आंदोलन पंजाब में पंधेर व डल्लेवाल द्वारा अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर चलाया जा रहा था लेकिन बुधवार को संयुक्त किसान मोर्चा ने भी साफ किया कि वह किसानों के साथ खुलकर खड़े हैं। 

एसकेएम ने अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन दे दिया है। हालांकि अभी तक कयास लगाए जा रहे थे आंदोलन विदेशों से चलाया जा रहा है लेकिन जिस तरह से आंदोलन की टाइमिंग बनी है, उसको लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा चल पड़ी है कि अकाली दल व भाजपा में अब समझौता होता है तो अकाली दल गांवों में जाने लायक नहीं रहेगा। अकाली दल का मुख्य वोट बैंक ही ग्रामीण क्षेत्र है। 

वहीं पंजाब सरकार खुलकर किसानी आंदोलन के समर्थन में उतर आई है। कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि हम किसानों के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं और खड़े रहेंगे। किसानों की मांगें जायज हैं। किसानों की न्यूनतम समर्थन मूल्य और कर्ज माफी की मांग बिल्कुल जायज है। धालीवाल ने कहा- पंजाब के सीएम मान ने दिल्ली में बैठक कर केंद्र सरकार को समझाने की कोशिश की।

 
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राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जिस तरह से आंदोलन खड़ा हो रहा है, उससे ग्रामीण इलाकों में अकाली दल को नुकसान हो सकता है, जो भाजपा के साथ समझौते को लेकर फाइनल राउंड में था। वहीं ग्रामीण इलाकों में आप को किसान हिमायती बताकर सत्ताधारी पार्टी के नेता आगामी लोकसभा चुनावों में इसका फायदा लेने की कोशिश भी करेंगे।
 
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