सिंघु बॉर्डर पर बढ़ती जा रही है किसानों की तादाद
कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए किसान केवल अपने ही राज्यों में आंदोलन नहीं कर रहे हैं। बल्कि लगातार सिंघु बॉर्डर पर भी पहुंच रहे हैं। वे किसानों को अपने यहां के आंदोलन के बारे में बताकर उनका हौसला भी बढ़ा रहे हैं। सिंघु बॉर्डर पर राजस्थान, महाराष्ट्र, ओडिशा, मध्य प्रदेश, केरल, कर्नाटक, बिहार, झारखंड के किसान पहुंचे हैं। जिन्होंने हर तरह से आंदोलन में साथ रहने की बात कही है और कृषि कानून रद्द कराने के बाद ही पीछे हटने का फैसला लिया है।
किसानों का यह आंदोलन पंजाब से शुरू होकर सिंघु बॉर्डर तक आया। हमारे यहां भी आंदोलन खड़ा किया गया। हमारे कुछ किसान यहां धरने पर आए हुए हैं, क्योंकि सभी किसान इतनी दूर से नहीं आ सकते हैं लेकिन ओडिशा में नव निर्माण किसान संगठन ने किसानों के साथ मिलकर राज्य के अंदर एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया है। यह आंदोलन अब तभी खत्म होगा, जब कृषि कानूनों को रद्द कर दिया जाएगा। उससे कम किसान कुछ भी मानने को तैयार नहीं है। - अक्षय कुमार, अध्यक्ष नव निर्माण किसान संगठन, ओडिशा
कृषि कानूनों के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन सरकार केवल एक ही तरह से खत्म करा सकती है और वह है, इन कृषि कानूनों को रद्द करना। किसानों को इससे कम कुछ मंजूर नहीं है और यह सरकार को साफ तौर पर बता दिया गया है। इसलिए सरकार जल्द से जल्द किसानों की मांग को मान लेना चाहिए। जब तक ऐसा नहीं होगा तो आंदोलन चलता रहेगा। अब यह किसी एक राज्य का आंदोलन नहीं है, बल्कि पूरे देश के किसानों का आंदोलन हो गया है। - योगेंद्र यादव, संस्थापक, जय किसान आंदोलन