इस बात का दूसरा सबूत यह है कि केंद्रीय मंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंस के द्वारा राज्य के किसानों को संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार किसान हितैषी होने का दावा करती है तो फिर वह किसानों के साथ सीधी बातचीत कर अपनी वाहवाही से क्यों भाग रही है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने एक तरफ किसान जत्थेबंदियों को नई दिल्ली में मीटिंग के लिए बुला लिया और दूसरी तरफ उनके केंद्रीय मंत्री मीटिंग से अनुपस्थित रहते हुए वर्चुअल मीटिंग कर रहे हैं। यह पंजाब का अपमान है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार इस मुद्दे को लेकर बहुत गंभीर है, अब कैबिनेट की तरफ से 19 अक्तूबर को पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र भी बुला लिया गया है।
किसानों की कद्र नहीं करती केंद्र सरकार: चीमा
आप के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा और प्रदेश महासचिव हरचंद सिंह बरसट ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की कद्र नहीं करती। दिल्ली में किसानों के साथ बैठक का बेनतीजा रहना इस बात का प्रतीक है। मोदी सरकार तानाशाही रवैया अपना कर फैसले को लागू करना चाहती है। मोदी सरकार ने ऐसा करके किसानों का ही नहीं बल्कि पूरे पंजाब का अपमान किया है। हरचंद सिंह बरसट ने कहा कि मोदी सरकार की तरफ से देश की किसानी को तबाह करने के लिए पूरे प्रबंध किए जा रहे हैं। जिसे किसी भी कीमत पर आम आदमी पार्टी सफल नहीं होने देगी और न ही बर्दाश्त करेगी।
भाजपा पंजाब में किसानों के मामले में कांग्रेस की भूलों को दोहरा रही है: सुखबीर
शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने दिल्ली में केंद्र सरकार द्वारा किसानों और उनके संगठनों के साथ किए गए व्यवहार की निंदा की है। उन्होंने कहा कि भाजपा भी पंजाब में किसानों के मामले में कांग्रेस की भूलों को दोहरा रही है। किसानों और नौजवानों को भड़काने के लिए उसी पंजाब विरोधी और किसान विरोधी षड्यंत्रों का सहारा ले रही हैं।
इससे संवेदनशील सीमावर्ती राज्य में शांति के साथ-साथ देश में स्थिरता के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अकाली दल अध्यक्ष ने मांग की है कि किसानों के खिलाफ सभी 'काले कानूनों' को खत्म किया जाना चाहिए और आगे किसान संगठनों से सलाह ली जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र ने एक बेहद अच्छे अवसर को बेकार कर दिया है।