केंद्रीय मंत्रियों संग किसानों की बैठक।
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कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे पंजाब के किसान संगठनों के साथ तीन केंद्रीय मंत्रियों की शुक्रवार को साढ़े सात घंटे से अधिक समय तक चली बैठक बेनतीजा रही। बैठक के बाद किसानों ने कहा कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो उनका आंदोलन और तेज होगा।
किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह बैठक काफी सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई और उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों के समक्ष किसानों की मांगों को विस्तार से पेश किया। केंद्रीय मंत्रियों ने भरोसा दिया है कि केंद्र सरकार किसानों की मांगों पर विचार के लिए एक कमेटी का गठन करेगी। इसके अलावा केंद्र सरकार से किसानों की अगली बैठक भी जल्द होगी।
केंद्र सरकार ने पंजाब के किसान संगठनों को शुक्रवार को बातचीत के लिए बुलाया था। विज्ञान भवन में सुबह 11.30 बजे शुरू हुई बैठक शाम 7 बजे के बाद समाप्त हुई। बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल और उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश ने किसानों के प्रतिनिधियों से बातचीत की।
किसानों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डॉ. दर्शन पाल, बलबीर सिंह राजेवाल और कुलंवत सिंह संधू ने किया। किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि बातचीत का दौर जारी रहेगा लेकिन वे 26-27 नवंबर को प्रस्तावित दिल्ली चलो आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। बैठक के बाद उन्होंने बताया कि इस बैठक में किसी मसले का हल नहीं निकल सका लेकिन दोनों ही पक्षों ने अपने-अपने विचार खुल कर रखे। यह पहली बैठक हुई है। आगे हो सकता है कि उनके मसलों का हल हो जाए।
किसानों की तरफ से बैठक में ये मांगें रखीं :
- कृषि सुधार से जुड़े तीनों कानून तुरंत वापस लिए जाएं क्योंकि इनके जरिए कृषि सेक्टर पर कॉरपोरेट घरानों की पकड़ मजबूत होगी।
- प्रस्तावित बिजली संशोधन एक्ट-2020 को वापस लिया जाए।
- पराली जलाने पर पांच साल की सजा और एक करोड़ रुपये जुर्माने की व्यवस्था किसानों के खिलाफ है। इसे वापस लिया जाए।
- जेलों में बंद किसानों के खिलाफ दर्ज किए गए केस तुरंत वापस लिए जाएं।
- पंजाब की जो आर्थिक नाकाबंदी की गई है, उसे तुरंत हटाया जाए और केंद्र सरकार पंजाब में मालगाड़ियां चलाने के आदेश जारी करे।