गणतंत्र दिवस के मौके पर नई दिल्ली में आयोजित परेड में हिस्सा लेने वाले 400 से ज्यादा कलाकार मेहमान बनकर चंडीगढ़ पहुंचे।
खूबसूरती और क्रिएशन के बल पर परेड में पहला जीतने वाले बंगाल की झांकी के कलाकार भी आए हुए थे। अमर उजाला से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि पहली बार उन्होंने झांकी में पुरलिया छौ नच को पेश किया और पहली बार में ही पहला स्थान हासिल किया।
ग्रुप के लीडर जोधाराम ने बताया कि पुरलिया छौ नच उनका पारंपरिक नृत्य है। इस ग्रुप में जुड़े सभी कलाकार खेतीबाड़ी या फिर मेहनत मजदूरी करते हैं।
काम करने के बावजूद वे अपने नृत्य के लिए समय निकाल लेते हैं। टीम के सभी सदस्यों को 31 जनवरी को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी सम्मानित किया। राष्ट्रपति से सम्मान पाकर वे काफी गदगद थे।
उन्होंने बताया कि अब उनके पारंपरिक नृत्य को एक पहचान मिल गई। झांकी में कलाकारों ने नृत्य के साथ दुर्गा माता द्वारा महिसासुर का वध दिखाया गया।
माता के मुख पर सात देवियों के अलग-अलग चेहरे थे। रॉक गार्डन में कलाकारों ने अपनी कलाबाजी का भी प्रदर्शन किया, जिसे देखकर लोग दंग रह गए। झांकी में दूसरे स्थान पर तमिलनाडु और तीसरे स्थान पर असम का नंबर आया है।
मेहमानों ने रॉक गार्डन, सुखना लेक व शहर के अन्य पर्यटन स्थल का लुत्फ उठाया और सिटी ब्यूटीफुल की खूबसूरती के कायल हो गए। उन्होंने कहा कि यह एक सपनों का शहर है। यहां की सड़के और ग्रीनरी काफी मनमोहक है।
राष्ट्रीय रंगशाला कैंप के ओएसडी एके घोष व चंडीगढ़ के जन संपर्क अधिकारी और संयुक्त गृह सचिव एमएम सभरवाल ने बताया कि गणतंत्र दिवस पर चंडीगढ़ की झांकी देखने के बाद इन कलाकारों ने चंडीगढ़ घूमने की इच्छा जताई थी।
चंडीगढ़ पहुंचने पर प्रशासन की ओर से इनका जोरदार स्वागत किया गया। इन कलाकारों को चंडीगढ़ तक आर्मी का काफिला लेकर आया था। कलाकारों ने रॉक गार्डन के अलावा सुखना लेक, रोज गार्डन सहित अन्य पर्यटन स्थलों का लुत्फ उठाया।