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पीयू में प्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ. हरीश नवल ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद का किसान संघर्ष करते- करते मर जाता, लेकिन आत्महत्या नहीं करता

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चंडीगढ़। मुंशी प्रेमचंद का किसान आज भी उसी रूप में मौजूद है। लेकिन एक अंतर अवश्य है कि उनका किसान चाहे संघर्ष करते करते मर जाता था, परंतु वह आत्महत्या नहीं करता था। यह बात शुक्रवार को पीयू में हिंदी विभाग की ओर से आयोजित प्रेमचंद जयंती उत्सव की पहली कड़ी में प्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ. हरीश नवल ने बतौर मुख्य वक्ता कही। इस अवसर पर ‘प्रेमचंद और मैं’ विषय कई कई वक्ताओं ऑनलाइन हिस्सा लेकर उनके नाटकों पर भी प्रकाश डाला।
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डॉ. हरीश नवल ने विशेष तौर पर प्रेमचंद के नाटकों के अनछुए पहलुओं को उजागर करते हुए बताया कि कर्बला को आधार बनाकर प्रेमचंद ने नाटक लिखा जो उनसे पहले हिंदी साहित्य में देखने को नहीं मिलता। उन्होंने बताया कि देश विदेश में कबीरदास व तुलसीदास के बाद सबसे अधिक शोधकार्य प्रेमचंद के साहित्य पर हो रहे हैं।
व्याख्यान के बाद प्रश्न उत्तर का सत्र
व्याख्यान के बाद प्रश्न-उत्तर का सत्र भी हुआ। एक सवाल के जवाब में डॉ. नवल ने कहा कि जब साहित्यकार किसी कहानी, उपन्यास, नाटक की रचना करता है तो बहुत बार वह पात्र किसी और उद्देश्य से गढ़ता है। एक सफल साहित्यकार की यही खूबी होती है कि उसके गढ़े पात्र खुद को स्वयं आगे बढ़ाते हैं वह खुद कहानी में अपने आपको स्थापित करते जाते हैं। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से 75 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें अल्मोड़ा, हैदराबाद, दिल्ली और बैंगलुरू शामिल हैं। कार्यक्रम में प्रो. नीरजा सूद और प्रो. नीरज जैन भी शामिल रहीं। विभाग के एमए द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी मयंक ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
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24 और 31 जुलाई को भी होगा कार्यक्रम
विभागाध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह ने बताया कि इस कड़ी में अगले व्याख्यान में 24 जुलाई को विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा और 31 जुलाई को प्रेमचंद जयंती के दिन आयोजित वेबगोष्ठी में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय और नई दिल्ली के प्रो. जितेंद्र श्रीवास्तव मुख्य वक्ता होंगे।
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