कोरोना महामारी के दौर में संक्रमण के बाद का बढ़ता मानसिक तनाव मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। ऐसी स्थिति से बचाव के लिए कम लक्षण वाले मरीजों को होम आइसोलेशन में भेजने की सुविधा शुरू की गई है। लेकिन वहां भी परिवार के बीच एकांतवास में रहते हुए मरीज तनाव का शिकार हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में उन पर मानसिक के साथ ही शारीरिक दुष्प्रभाव भी पड़ रहा है।
अब ऐसे मरीजों की ऑनलाइन काउंसिलिंग कर उन्हें तनाव प्रबंधन के बारे में जानकारी दी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते इन मरीजों को तनावमुक्त नहीं किया गया तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है। मौजूदा समय में जीएमएसएच-16 के लगभग 250 मरीज होम आइसोलेशन में हैं जबकि डेढ़ सौ से ज्यादा होम आइसोलेशन पीरियड को पूरा कर चुके हैं।
एकांतवास का ऐसे पड़ रहा दुष्प्रभाव
जीएमएसएच-16 के मनोचिकित्सक डॉ. गिरधर का कहना है कि होम आइसोलेशन में परिवार के बीच होते हुए भी अलग रहने की स्थितियों के कारण मरीजों में तनाव बढ़ रहा है। सामान्य तनाव तो हमारे लिए अच्छा होता है और इससे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलता है लेकिन ज्यादा तनाव, नुकसानदेह बन जाता है।
यह तब होता है जब हमें आगे कोई रास्ता नहीं दिखता। मरीज को घबराहट होती है और ऊर्जाहीन महसूस करता है। फिलहाल महामारी की चपेट में आने के बाद अनिश्चितता और उलझन है कि कब तक सब ठीक होगा। ऐसी स्थिति अकेलेपन में तनाव बढ़ा रहा है। इस तनाव का असर शरीर, दिमाग, भावनाओं और व्यवहार पर पड़ रहा है।
शरीर पर असर- बार-बार सिरदर्द, रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना, थकान, और ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव।
भावनात्मक असर - चिंता, गुस्सा, डर, चिड़चिड़पना, उदासी और उलझन।
दिमाग पर असर - बार-बार बुरे ख्याल आना। जैसे मेरी नौकरी चली गई तो क्या होगा, परिवार कैसा चलेगा। सही और गलत समझ ना आना, ध्यान नहीं लगा पाना।
काउंसलिंग में दी जा रही यह सलाह
मानसिक तनाव की स्थिति से बाहर निकलना बहुत जरूरी है वरना तनाव अंतहीन हो सकता है। डॉ. गिरधर के मुताबिक कुछ तरीकों से खुद को शांत रखा जा सकता है।
- खुद को मानसिक रूप से मजबूत करना जरूरी है। यह बात ठीक से समझनी होगी और विश्वास करना होगा कि सब कुछ फिर से ठीक होगा। बस धैर्य के साथ इंतजार करें।
- अपने रिश्तों को मजबूत करें। छोटी-छोटी बातों का बुरा न मानें। मोबाइल पर ही सही पर एक-दूसरे से बातें करें, निगेटिव बातों पर चर्चा कम करें।
- अपनी दिनचर्या को बनाए रखें। इससे हमें एक उद्देश्य मिलता है और सामान्य महसूस होता है। हमेशा की तरह समय पर सोना, जागना, खाना-पीना और व्यायाम करें।
- एक महत्वपूर्ण तरीका यह है कि इस समय का इस्तेमाल अपनी हॉबी पूरी करने में करें। वह मनपसंद काम जो समय न मिलने के कारण आप न कर पाए थे। इससे आपको बेहद खुशी मिलेगी।
- अपनी भावनाओं को जाहिर कीजिए। अगर डर, उदासी है तो अपने अंदर छुपाएं नहीं बल्कि परिजनों या दोस्तों के साथ शेयर करें। जिस बात का बुरा लगता है, उसे पहचानें और जाहिर करें।
होम आइसोलेशन वाले मरीजों का मानसिक तनाव कम करने के लिए अस्पताल के मनोचिकित्सक समय-समय पर उनकी काउंसलिंग का तनाव से बचाव के तरीके बता रहे हैं।
- डॉ वीके नागपाल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जीएमएसएच-16