सरकार ने एक्ट में संशोधन के बाद जारी की अधिसूचना
बीसीए के आरक्षण के लिए भी रास्ता साफ, विधानसभा में बने एक्ट के बाद अधिसूचना जारी
चंडीगढ़। हरियाणा के शहरी निकायों के चुनाव में वार्डबंदी के लिए परिवार पहचान पत्र के डाटा का भी प्रयोग किया जाएगा। इसके साथ-साथ जनसंख्या के आधार पर बीसीए को आरक्षण का रास्ता भी साफ हो गया है। मई में सरकार ने दोनों फैसलों के संबंध में अध्यादेश जारी किया था। इसके बाद अगस्त में हुए विधानसभा सत्र में अध्यादेश को एक्ट के तौर पर मंजूरी दी थी। अब इस एक्ट के संबंध में अधिसूचना जारी की है। सरकार के फैसले के अनुसार निकाय चुनावों में वार्डबंदी के लिए परिवार पहचान पत्र के डाटा या फिर मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या में जो भी संख्या ज्यादा होगी, उसे वार्डबंदी का आधार बनाया जाएगा। नए फार्मूले के अनुसार यदि किसी वार्ड में परिवार पहचान पत्र में यदि जनसंख्या 150 है और मतदाता सूची में 100 मतदाता हैं तो इस वार्ड की जनसंख्या 140 मानी जाती है। ऐसे में परिवार पहचान पत्र का डाटा वार्डबंदी का आधार माना जाएगा। यदि इसके विपरीत स्थिति हुई कि परिवार पहचान पत्र में डाटा वार्ड की मतदाताओं के हिसाब से जनसंख्या से कम है तो वार्डबंदी का आधार मतदाता सूची का डाटा बनेगा।
पिछड़ा वर्ग ए को निकाय चुनावों में आरक्षण दिया जाएगा
एक्ट में स्पष्ट किया कि पिछड़ा वर्ग ए को निकाय चुनावों में आरक्षण दिया जाएगा। इसके लिए शहर में पिछड़ा वर्ग ए की जनसंख्या के हिसाब से फैसला लिया जाएगा। फैसले के लिए यदि किसी शहर की जनसंख्या 100 है और उस शहर में पिछड़ा वर्ग की आबादी 10 प्रतिशत है तो इस आबादी का आधा पांच के हिसाब से पांच प्रतिशत सीटें बीसीए के लिए आरक्षित होंगी। इस शहर में यदि 20 सीटें हैं तो 20 सीटों का पांच प्रतिशत यानि बीसीए की एक सीट बनेगी। इस एक सीट के लिए उन तीन वार्डों का ड्राॅ निकाला जाएगा, जिन वार्डाें में बीसीए की जनसंख्या सबसे अधिक है। हालांकि नगर निकायों के अध्यक्षों के लिए बीसीए को सीधा आठ प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। नए प्रावधान के अनुसार किसी भी सूरत में कुल सीटों का आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। यदि किसी शहर में आरक्षित सीटों की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक बनती है तो बीसीए की सीटें कम की जाएंगी। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी।