1947 में जालंधर आकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) का गठन किया और 30 साल तक अध्यक्ष रहे। पिताजी एसएन कपूर अक्सर गुजरांवालों के संघर्ष की कहानी सुनाते थे। एक भारतवंशी के ब्रिटिश पीएम बनने पर गर्व महसूस हो रहा है। उनकी दादी कृष्णा कपूर भी गुजरांवाला की थी। हमें मान हैं अपने बुजुर्गों पर, जो उस विरासत का हिस्सा हैं, जो आज का इतिहास बन गया।
संयोग: दादा गुजरांवाले और दादी जालंधर की
जालंधर में किसी से भी पूछ लें सभी को पता है कि गुजरांवाला ज्वैलर्स की दुकान कहां है। जालंधर के ज्योति चौक में गुजरांवाला ज्वैलर्स (भोलू शाह ग्रुप) के मालिक राजीव जैन बताते हैं कि उनके पिता कस्तूरी लाल जैन गुजरांवाला (जोकि अब पाकिस्तान में है) के थे और मां शांति देवी जैन जालंधर की थीं। भारतवंशी ऋषि सुनक ने ब्रिटेन का पीएम बन इतिहास लिख दिया। ब्रिटेन में अभी भारवंशी नस्लभेदी टिप्पणियों का शिकार होते हैं... जैसे आखिर तुम हमारे गुलाम थे, अब वही भारतीय गर्व से सीना तानकर चलेंगे।
अतीत में क्या हुआ, इसे याद करने से क्या फायदा
आजादी से पहले और बाद के दशकों में क्या हुआ, लोग अब उस पर नहीं वर्तमान को जी रहे हैं। भारतीयों के लिये ये दशक स्वर्णिम है, हमारी चर्चाएं विश्व पटल पर हो रही हैं। ब्रिटिश पीएम बन भारतवंशी ऋषि सुनक ने हमें गौरवान्वित कर दिया। ये शब्द पाकिस्तान के कोहाठ जिले से आए जगत राम (95) और जीवन दास (85) जिन्हें पिशोरी (पेशावरी) भी कहते हैं। बंटवारे के बाद वह पाकिस्तान छोड़ने पर मजबूर हुए। उन्होंने कहा कि हम तब भी भारतवंशी थे और आज भी हैं। बस कुछ सालों के संघर्ष के बाद हम हिंदुस्तानी नागरिक बने सके।