पंजाब में राजनीतिक द्वेष के कारण 437 नेताओं के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज किए। इसका खुलासा 420 पन्नों की जांच रिपोर्ट में हुआ है। दर्ज मुकदमों में आम आदमी पार्टी (आप), कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेताओं के नाम शामिल हैं। आयोग द्वारा सरकार को रिपोर्ट सौंप दी गई है। सूबे की नई सरकार रिपोर्ट पर कानूनी राय ले रही है, जिसके बाद दर्ज मुकदमों को लेकर कोई फैसला लिया जाएगा।
पंजाब पुलिस द्वारा बेगुनाहों को राजनीतिक और अन्य कारणों से झूठे मामलों में फंसाना लंबे समय से अटकलों का विषय रहा है। वर्ष 2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में बनी पंजाब सरकार ने अकाली शासन के 10 वर्षों के दौरान दर्ज मुकदमों की पड़ताल के लिए जांच आयोग बनाया था। न्यायमूर्ति मेहताब सिंह गिल को अध्यक्ष बनाया गया था।
आयोग ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट नई सरकार को सौंप दी है। 420 पन्नों की इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 437 नेताओं के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और दुष्कर्म जैसे अपराधों के लिए झूठे मामले दर्ज किए गए हैं। नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस एक्ट के प्रावधानों के तहत भी प्राथमिकी दर्ज की गई है।
आयोग से 2021 में गिल ने दिया इस्तीफा
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के एक पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गिल ने राज्य के मुख्य सतर्कता आयुक्त के रूप में नियुक्ति के बाद पिछले साल मार्च में आयोग से इस्तीफा दे दिया था। आयोग के सदस्य और सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बीएस मेहंदीरत्ता ने तब अध्यक्ष का पदभार संभाला और 31 अंतरिम रिपोर्ट के बाद अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की।
पांच साल में मिलीं 4265 शिकायतें
अप्रैल 2017 में जस्टिस गिल के तहत आयोग की स्थापना के बाद से कुल 4,702 शिकायतें मिलीं थीं। जांच में 437 शिकायतों में से 360 मामलों में आयोग के आदेशों को लागू करने की सलाह दी गई है। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि झूठे मुकदमों को दर्ज करने के पीछे का उद्देश्य लोक सेवक को अपनी वैध शक्ति का उपयोग किसी अन्य व्यक्ति को क्षति पहुंचाने के लिए किया गया है।
दोषी अधिकारियों के खिलाफ हो कार्रवाई
पंजाब पुलिस द्वारा झूठे मुकदमों का ब्योरा देते हुए रिपोर्ट में दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। साथ ही पीड़ित पक्ष को दिए जाने वाला हर्जाना भी पुलिस अधिकारियों की जेब से ही दिलाने को आयोग ने कहा है।