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Chandigarh News: बुड़ैल और मलोया में नकली दवा कंपनी का भंडाफोड़

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चंडीगढ़। यूटी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने एक संयुक्त ऑपरेशन में बुड़ैल और मलोया में चल रही नकली दवा कंपनियों का भंडाफोड़ किया है। कंपनियां नकली दवाओं का निर्माण कर बाजार में उतारने की तैयारी में थीं, लेकिन विभाग ने दबिश देकर लगभग 8.10 लाख रुपये का स्टॉक सीज कर लिया। जांच में आठ प्रकार की दवाइयां नकली पाई गई हैं। इनमें दवा के कंटेट के नाम पर कुछ भी नहीं मिला है। जानकारी के अनुसार बीते 20 अप्रैल को चंडीगढ़ के स्वास्थ्य सचिव के निर्देश पर शहर में दवाओं की निगरानी के मकसद से चंडीगढ़ प्रशासन और निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं की अध्यक्षता में ड्रग इंस्पेक्टर अमित लखनपाल और तजिंदर सिंह की एक टीम का गठन किया गया। टीम ने बुड़ैल की एक मार्केट में चल रही एक दवा कंपनी में दबिश दी। इस दौरान पाया गया कि दवा कंपनी ने एंटीबॉयोटिक्स का स्टॉक जमा कर रखा था, जिसकी खरीद से संबंधित फर्म के पास कोई रिकॉर्ड नहीं था। शक के आधार पर टीम ने मौके पर से नौ सैंपल एकत्र किए और उन्हें चंडीगढ़ प्रशासन के गवर्नमेंट एनालिस्ट को भेजा। बाद में इन सैंपलों को जांच के लिए राज्य औषधि नियंत्रण प्राधिकरण हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड भेजा गया, जहां ये दवाएं नकली पाई गईं। गवर्नमेंट एनालिस्ट ने भी अपनी जांच में इन दवाओं में जीरो कंटेट बताया यानी दवाइयां पूरी तरह से नकली थीं।
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इसके अलावा दवा निरीक्षकों की इस टीम ने चंडीगढ़ के मलोया स्थित मेसर्स प्रोसीड फॉर्मुलेशंस डेराबस्सी, पंजाब में दबिश दी। यहां कंपनी की ओर से एवीआई-क्लैव 625 एलबी दवा का निर्माण किया जा रहा था। टीम ने शक के आधार पर यहां से करीब 3.5 लाख रुपये मूल्य की दवाइयां सीज कीं। गवर्नमेंट एनालिस्ट की जांच में इन दवाओं में भी ड्रग कंटेट शून्य पाए गए। स्वास्थ्य विभाग ने डिफॉल्टर दवा कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
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