-चुनाव विवाद की ऑडियो क्लिप को जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी को सौंपें
-चुनाव आयोग और राज्य सरकार को हाईकोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनावों के दौरान नामांकन प्रक्रिया को प्रभावित करने के कथित निर्देशों से जुड़ी वायरल ऑडियो क्लिप मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि निष्पक्ष चुनाव तभी संभव हैं जब उनसे जुड़े विवादों की जांच भी पूरी तरह निष्पक्ष हो। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने ऑडियो क्लिप सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को राज्य सरकार के नियंत्रण से बाहर किसी स्वतंत्र एजेंसी को फॉरेंसिक जांच के लिए सौंपने के निर्देश दिए हैं।
पीठ ने साफ किया कि जांच प्रक्रिया में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामला उस कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग से जुड़ा है जिसमें एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी (एसएसपी) की आवाज होने का दावा किया गया है। आरोप है कि इस क्लिप में चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने के निर्देश दिए गए थे। याचिकाकर्ताओं ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा बताते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की थी।
राज्य सरकार और चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि मूल रिकॉर्डिंग डिवाइस उपलब्ध न होने के कारण फॉरेंसिक जांच आगे नहीं बढ़ सकी। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया कि शिकायतकर्ताओं ने कई बार नोटिस देने के बावजूद रिकॉर्डिंग डिवाइस पेश नहीं की। इस पर हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले से दर्ज एफआईआर के तहत जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करना आवश्यक है और इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य ऐसी एजेंसी को सौंपे जाने चाहिए जो राज्य सरकार के नियंत्रण या निगरानी में न हो।
चुनाव आयोग के रवैये पर भी नाराजगी
अदालत ने चुनाव आयोग के रवैये पर भी नाराजगी जताई। पीठ ने कहा कि जब पहले ही कोर्ट ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे, खासकर पटियाला क्षेत्र को लेकर, तो आयोग से अधिक संवेदनशीलता और गंभीरता की अपेक्षा थी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव अवधि के दौरान पूरा प्रशासनिक और पुलिस तंत्र चुनाव आयोग के नियंत्रण, अनुशासन और पर्यवेक्षण में होता है। ऐसे में यह तर्क स्वीकार्य नहीं कि ऑडियो क्लिप को स्वतंत्र एजेंसी को नहीं भेजा जा सकता। हाईकोर्ट ने दो टूक कहा कि लोकतंत्र की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए हर स्तर पर पारदर्शिता और निष्पक्षता जरूरी है।