-समझौते के बाद मुकरने पर हाईकोर्ट ने अपनाया कड़ा रुख
-इस तरह की हरकतों से कानून की गरिमा व न्याय व्यवस्था की साख को पहुंचता है नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत पाने के लिए समझौते का दिखावा कर बाद में वादों से मुकरने वाले आरोपियों पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने ऐसी प्रवृत्ति को न्यायालय की उदारता का दुरुपयोग बताते हुए 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और कहा कि इससे कानून की गरिमा व न्याय व्यवस्था की साख को गंभीर नुकसान पहुंचता है।
जस्टिस सुमित गोयल ने स्पष्ट किया कि समझौते का बहाना बनाकर गिरफ्तारी से राहत लेना और फिर उससे पीछे हट जाना खतरनाक प्रवृत्ति है जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के साथ छल करने वालों के खिलाफ कड़ा संदेश देना जरूरी है।
मामला लुधियाना के एक हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़ा है जहां फ्लैट खरीदार से 37 लाख रुपये से अधिक की राशि लेकर न तो फ्लैट दिया गया और न ही रकम लौटाई गई। आरोपी कंपनी निदेशक ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। अदालत के निर्देश पर मध्यस्थता हुई, जिसमें आरोपी ने वैकल्पिक सुसज्जित फ्लैट देने और दिसंबर 2022 तक रजिस्ट्री कराने का आश्वासन दिया। इसी आधार पर जनवरी 2022 में उसे अग्रिम जमानत दी गई।
बाद में शिकायतकर्ता ने कोर्ट को बताया कि आरोपी ने कोई वादा पूरा नहीं किया। इस पर हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत रद्द कर दी और आरोपी को 15 दिन में ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण का आदेश दिया। साथ ही 25 हजार रुपये का जुर्माना पंजाब राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराने के निर्देश दिए। कोर्ट ने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में उदाहरणात्मक कार्रवाई ही न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रख सकती है।