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Chandigarh News: 22.20 लाख रुपये लेकर फ्लैट नहीं दिया, अब ब्याज समेत लौटाने होंगे रुपये

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जीरकपुर के रॉयल एम्पायर प्रोजेक्ट का मामला, पंजाब रेरा ने बिल्डर को 90 दिन में रकम लौटाने के दिए आदेश
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माई सिटी रिपोर्टर
मोहाली। जीरकपुर के किशनपुरा स्थित रॉयल एम्पायर (रॉयल मिनार) प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कराने के बाद कब्जा नहीं मिलने के मामले में पंजाब रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (पंजाब रेरा) ने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। प्राधिकरण ने बिल्डर को 22.20 लाख रुपये की मूल रकम वापस करने के साथ उस पर निर्धारित ब्याज देने के आदेश दिए हैं। यह भुगतान आदेश की तारीख से 90 दिन के भीतर करना होगा। शिकायतकर्ता ने रेरा में दायर शिकायत में बताया था कि उसने 10 जून 2011 को रॉयल एम्पायर प्रोजेक्ट में फ्लैट नंबर 502, ब्लॉक-ए बुक कराया था। फ्लैट की कुल कीमत 35 लाख रुपये तय की गई थी। इसके बाद अलग-अलग तारीखों पर बिल्डर को कुल 22.20 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
21 से 24 महीने में मिलना था कब्जा
एग्रीमेंट टू सेल के क्लॉज-7 के अनुसार फ्लैट का निर्माण पूरा कर 21 से 24 महीने के भीतर कब्जा दिया जाना था। इस हिसाब से कब्जा देने की अंतिम अवधि करीब जून 2013 में समाप्त हो गई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार इसके बावजूद उसे न तो फ्लैट का कब्जा दिया गया और न ही जमा रकम वापस की गई। मामले की सुनवाई के दौरान बिल्डर पक्ष रेरा के समक्ष पेश नहीं हुआ। नोटिस की विधिवत तामील के बावजूद जवाब दाखिल नहीं करने पर 14 मई 2026 को बिल्डर को एक्स-पार्टी कर दिया गया। हालांकि, रेरा ने स्पष्ट किया कि केवल बिल्डर के पेश नहीं होने से शिकायतकर्ता के आरोप स्वत: सिद्ध नहीं माने जाएंगे। प्राधिकरण ने शिकायतकर्ता की ओर से पेश दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच की।
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2022 में तीसरे पक्ष को ट्रांसफर हुई जमीन

शिकायतकर्ता ने आरटीआई के माध्यम से हासिल दस्तावेज भी रेरा के समक्ष पेश किए। इनमें सामने आया कि प्रोजेक्ट की जमीन मई 2022 में मूल प्रमोटर ने तीसरे पक्ष को ट्रांसफर कर दी थी। इसके बाद 7 मार्च 2023 को इसी जमीन पर व्यावसायिक प्रोजेक्ट विकसित करने के लिए लाइसेंस/अनुमति भी हासिल की गई। शिकायतकर्ता ने रेरा को बताया कि उसने न तो अपने आवासीय फ्लैट के अधिकार छोड़ने पर सहमति दी थी और न ही प्रोजेक्ट को व्यावसायिक प्रोजेक्ट में बदलने की अनुमति दी थी।


जमा तारीख से मिलेगा निर्धारित ब्याज
पंजाब रेरा ने माना कि मामला महज कब्जा देने में देरी का नहीं है। मूल आवासीय प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ, फ्लैट का कब्जा नहीं दिया गया और शिकायतकर्ता की रकम भी वापस नहीं की गई। ऐसे में शिकायतकर्ता को प्रोजेक्ट से बाहर निकलकर रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट की धारा 18(1) के तहत रिफंड लेने का अधिकार है। प्राधिकरण ने बिल्डर को 22.20 लाख रुपये की मूल राशि लौटाने के साथ प्रत्येक किस्त पर उसकी संबंधित जमा तारीख से वास्तविक भुगतान तक पंजाब रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) रूल्स-2017 के नियम 16 के तहत निर्धारित ब्याज देने के आदेश दिए हैं। हालांकि, शिकायतकर्ता की ओर से मांगी गई 18 प्रतिशत सालाना संविदात्मक ब्याज दर को रेरा ने मंजूर नहीं किया।
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90 दिन में भुगतान, नहीं तो होगी प्रवर्तन कार्रवाई

रेरा ने बिल्डर को मूल रकम और उस पर अर्जित ब्याज का भुगतान आदेश की तारीख से 90 दिन के भीतर करने के निर्देश दिए हैं। आदेश का पालन नहीं होने की स्थिति में शिकायतकर्ता को रेरा कानून के तहत आदेश की एग्जीक्यूशन अथवा प्रवर्तन कार्रवाई शुरू करने की स्वतंत्रता होगी।
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