सोशल साइट फेसबुक आजकल सभी के जीवन का हिस्सा बन चुकी है। यूजर्स की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
बर्थ डे, दोस्ती, ब्रेकअप, विदाई व सफलता का जश्न फेसबुक से शेयर हो रहा है।
कई लोगों की जिंदगी फेसबुक से शुरू होकर यही पर खत्म हो रही है। जब इतना सब कुछ यहां पर हो रहा है तो बीमारियां कैसे पीछे रह सकती हैं। फेसबुक के कई यूजर्स मानसिक तनाव में आ रहे हैं।
कोई किसी के स्टेटस से अपसेट है तो कोई किसी की खूबसूरती देखकर। विशेषज्ञों ने खुलासा किया है कि यह दिक्कत उन व्यक्तियों में ज्यादा आ रही है, जो पहले से ही तनाव में हैं, जो छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा कर जाते हैं और जो ओवरसेंसटिव हैं।
फिलहाल यह समस्या किसी बीमारी की श्रेणी में तो नहीं आती लेकिन इसे बीमारी का प्रथम चरण जरूर कह सकते हैं। यदि तनाव को नहीं रोका गया तो वह व्यक्ति मनोरोगी की श्रेणी में आ जाएगा।
मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि कई व्यक्तियों में ‘जैलसी फैक्टर’ होता है। यह फैक्टर उनमें तनाव बढ़ाता है। ऐसे व्यक्तियों का जब कोई दोस्त या दूसरा शख्स अपना स्टेटस अपडेट करता है और उस पर खूब लाइक और कमेंट आने लगते हैं तो ऐसे व्यक्ति तनाव में आ जाते हैं। बाद में यह प्रक्रिया उनकी आदत में शुमार हो जाती है।
कई बार ऐसे स्टेटस देखकर लोग गंभीर कदम भी उठा लेते हैं। शुरुआत में तो लोगों को समझ में नहीं आता। उन्हें लगता है कि यह सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन यह बीमारी के लक्षण होते हैं।
इस श्रेणी के लोगों में फेसबुक से हो रहा तनाव
जिन व्यक्तियों में आत्मविश्वास की कमी है या पहले से ही तनाव में हैं।जो छोटी-छोटी बात पर गुस्सा हो जाते हैंजो किसी से जल्दी इमोशनल अटैच हो जाते हैंजो व्यक्ति अपने आपको एकाग्र नहीं रख पाते
ऐसे बचें तनाव से
अपने आप पर विश्वास रखे, जितना है उसी में खुश रहेंफेसबुक पर कम समय बिताएंहमेशा सकारात्मक रवैया रखेंअपनी किसी अच्छी हॉबी को विकसित करें।
इस संबंध्ा में जीएमसीएच 32 के मनोचिकित्सक विभाग के हेड आफ डिपार्टमेंट प्रोफेसर बी एस चवन ने बताया कि आत्मविश्वास से रहित व्यक्ति जल्दी फेसबुक और अन्य सोशल साइट से तनाव में आ जाते हैं।
इस श्रेणी के लोग अपने आपको हमेशा कम आंकते हैं। इन्हें साइकोलॉजिकल प्राब्लम होती है। ऐसे व्यक्तियों को जल्द से जल्द मनोचिकित्सक के पास जाना चाहिए।