फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमर उजाला संवाद में विशेषज्ञों ने सुझाया निदान : दोगुना हो किसानों का अनुदान..,खेत में ही पराली का समाधान

Wed, 20 Nov 2024 06:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़

सार

पराली का प्रबंधन कैसे हो, इस विषय पर अमर उजाला ने विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ संवाद किया। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर ने कहा कि पराली दहन व प्रदूषण को रोकने का समाधान व्यावहारिक नहीं है।
विज्ञापन
file pic - फोटो : संवाद।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली-एनसीआर समेत हरियाणा के कई शहर व गांव प्रदूषण की चपेट में है। प्रदूषण के लिए धान के अवशेष यानी पराली जलाने की घटनाओं को सबसे बड़ा जिम्मेदार माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है, पराली का सबसे सटीक प्रबंधन किसान के खेत में ही है। 

विज्ञापन


पराली का प्रबंधन कैसे हो, इस विषय पर अमर उजाला ने विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ संवाद किया। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर ने कहा कि पराली दहन व प्रदूषण को रोकने का समाधान व्यावहारिक नहीं है। सरकारी रिपोर्ट बताती है कि एक से 31 अक्तूबर के बीच प्रदूषण में पराली का पांच फीसदी हिस्सा था। एक से 15 नवंबर के बीच प्रदूषण में पराली का हिस्सा सिर्फ 20-25 फीसदी था। पराली को खेत में ही मिट्टी में मिलाकर उसके निस्तारण की विधि सबसे सटीक व व्यावहारिक होगी।

धान की कटाई व गेहूं की बिजाई के बीच में काफी कम दिन होने से पराली को खेतों से निकालर विभिन्न तरह से उपयोग करना मुश्किल है। यदि सरकार अक्तूबर में ही किसानों के खाते में दो हजार रुपये डाल दे और किसानों को खेत में ही सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट व एमबी प्लोग मशीन उपलब्ध कराई जाए तो किसान 15 दिन में पराली का खेत में निस्तारण कर देगा। 
विज्ञापन


इस बार 50% केस कम दर्ज : डॉ. जसविंदर
कृषि के संयुक्त सचिव डॉ. जसविंदर सिंह ने बताया, पिछले साल के मुकाबले इस बार 50% केस कम दर्ज किए गए हैं। बागवानी के संयुक्त निदेशक डॉ. मनोज कुंडू ने बताया, कुछ फीसदी किसान धान छोड़कर बागवानी अपनाएं तो इससे फर्क पड़ेगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक रविंद्र सिंह ने कहा, प्रदूषण नियंत्रण के लिए बोर्ड ने कई कदम उठाए हैं। किसान नेता रतन मान ने कहा, पराली प्रबंधन की 25 लाख की मशीनें छोटा किसान नहीं खरीद सकता।  

किसान खुद आगे आएं : प्रो. सुमर
पंजाब विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग की प्रो. सुमर मोर ने कहा कि किसानों को खुद आगे आना होगा। सरपंच अपने गांव को रोल मॉडल बनाएं। एक मंच पर आकर सभी को एक साथ काम करना होगा। पीजीआई के स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर रविंद्रा खैवाल ने बताया कि धान में कीटनाशकों का स्प्रे होता है। जब पराली को जलाते हैं तो कीटनाशकों के प्रभाव से उससे निकलने वाला धुआं साइनाइड के बराबर खतरनाक हो जाता है।
विज्ञापन




 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें