हरियाणा की दो बिजली वितरण कंपनियां उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) से दो हजार करोड़ रुपये की बिजली चोरी, 4800 करोड़ रुपये के बकाया बिल और बैंकों से लिए कर्ज ने कमर तोड़कर रख दी है।
यूएचबीवीएन और डीएचबीवीएन ने हरियाणा बिजली नियामक आयोग के पास तीन वित्त वर्षों 2014-15, 15-16, 16-17 के लिए सालाना राजस्व जरूरत (एआरआर) दायर कर रखी है। दोनों निगमों को 7384 करोड़ रुपये का घाटा होने की संभावना जताई है। इसके बावजूद निगमों ने आयोग से आग्रह किया है कि इस घाटे की भरपाई के लिए बिजली दरें न बढ़ाई जाएं। आयोग 16 मई के बाद इस आग्रह पर फैसला सुनाएगा।
यूएचबीवीएन ने एआरआर में कहा कि पिछले वित्त वर्ष 2013-14 में 2500 करोड़ रुपये का घाटा की संभावना है जबकि चालू माली साल में 2246 करोड़ रुपये का घाटा हो सकता है। इस तरह 2014-15 में यूएचबीवीएन को कुल 4746 करोड़ रुपये का घाटा रहेगा।
डीएचबीवीएन ने एआरआर में कहा कि है कि 2013-14 में 895.57 करोड़ रुपये का घाटा संभावित है। चालू माली साल2014-15 में 1617.34 करोड़ रुपये का घाटा होने का अनुमान है। इस तरह दोनों निगमों को चालू माली साल में 7248 करोड़ रुपये का घाटा होने का अनुमान है।
अगले दो सालों घाटे का यह लगाया अनुमान
दोनों निगमों ने अगले दो वित्त वर्षों के लिए भी संभावित घाटा बताया है। उत्तर हरियाणा ने 2015-16 में 1174 करोड़ रुपये और दक्षिण हरियाणा ने 240 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया है। वर्ष 2016-17 में उत्तर हरियाणा निगम ने 343 करोड़ और दक्षिण हरियाणा ने 1702 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया है।
विधानसभा चुनाव होते ही बढ़ेंगी दरें
दोनों कंपनियों ने आयोग के पास बेशक 2014-15 के लिए घाटे के बावजूद बिजली दरें न बढ़ाने का अनुरोध कर रखा है। इसलिए 2014 में विधानसभा चुनाव होने के बाद 2015-16 और 2016-17 में बिजली दरें बढ़ाने का आग्रह किया है। यह अलग बात है कि आयोग हर साल एकत्र हुए राजस्व के अनुसार बिजली दरें बढ़ाने या न बढ़ाने का फैसला करेगा।
खेती की बिजली सस्ती, 5500 करोड़ रुपये का बोझ
हरियाणा की दोनों बिजली वितरण कंपनियों (यूएचबीवीएन और डीएचबीवीएन) ने बिजली नियामक आयोग के पास दायर एआरआर में अगले वित्त वर्ष 2014-15 में सस्ती बिजली देने के बदले 5189 करोड़ रुपये की सब्सिडी देने का अनुमान लगाया गया था। मगर बाद में मुख्यमंत्री ने कृषि बिजली दर 25 पैसे प्रति यूनिट से घटाकर 10 पैसे प्रति यूनिट कर दी थी।
इसलिए पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सामने बिजली निगमों ने सब्सिडी के रूप में 5500 करोड़ की सब्सिडी देने की मांग की थी। वैसे निगमों ने 25 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली देने के बदले सरकार से कृषि सब्सिडी के रूप में 2015-16 के लिए 5468 करोड़ और 2016-17 के लिए 5793 करोड़ रुपये की सब्सिडी मांगी है।
कोट
दोनों निगमों की एआरआर पर सुनवाई पूरी हो चुकी है। लोकसभा चुनाव के कारण लगी आदर्श चुनाव आचार संहिता के चलते आयोग ने फैसला नहीं सुनाया था। अब यह फैसला 16 मई के बाद सुनाया जाएगा।
- आरएन पाराशर, अध्यक्ष, हरियाणा बिजली नियामक आयोग।