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सर्जिकल स्ट्राइक में शामिल कैप्टन से खास बातचीत, बोले- जिंदा लौटना मुश्किल था

Sat, 09 Dec 2017 04:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Surgical Strike - फोटो : File Photo
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29 सितंबर 2016 को इंडियन आर्मी ने एलओसी पार आतंकियों के लांचिंग पैड तबाह कर पाकिस्तान को करारा जवाब दिया था। इस ऑपरेशन को अंजाम देने वाले सैन्य अफसरों जवानों का दुश्मन की मांद से जिंदा वापस लौटना आसान नहीं था।
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ऑपरेशन का हिस्सा रहे फोर्स के एक कैप्टन ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि इस सर्जिकल स्ट्राइक में जितना आसान दुश्मन के एरिया में जाना था, उतना ही मुश्किल ऑपरेशन फतह कर वापस लौटना था। क्योंकि तब तक फोर्स की पोजिशन दुश्मन को मालूम चल चुकी थी।

सैन्य अधिकारी के अनुसार सरहद पार आतंकियों के लांचिंग पैड तबाह करने के बाद ऑपरेशन में शामिल इंडियन फोर्स की पोजिशन लोकेट हो गई थी। इसके  बाद पाक सेना ने इंडियन फोर्स पर ताबड़तोड़ फायरिंग करते हुए उन्हें घेरने का प्रयास किया। पांच घंटे तक  इंडियन फोर्स अपनी पोजिशन कायम रखते हुए पाक फायरिंग से जूझती रही। लेकिन इंडियन आर्मी की रणनीति खासी मजबूत थी, जिसके चलते सरहद पार फायरिंग से जूझ रहे इन जवानों को तुरंत हैवी कवर फायरिंग दी गई। इसके  चलते पाक सेना भी लड़खड़ा गई और अंतत: इंडियन फोर्स के सभी जवान सकुशल वापस देश की सीमा में लौट आए। इस ऑपरेशन में जवानों ने तीन अलग-अलग टारगेट एरिया में इंडियन फोर्स में पीओके के अंतर्गत आतंकियों के 7 लांचिंग पैड तबाह कर पाक सेना के 2 जवान व 38 आतंकी मारे गए थे।
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Surgical Strike
उरी हमले के दिन ही हो गया था सर्जिकल स्ट्राइक का फैसला
सर्जिकल स्ट्राइक का फैसला सेना ने उरी में आतंकियों द्वारा किए गए हमले के बाद ही कर लिया था। पाकिस्तान और पाक समर्थित आतंकियों को कड़ा सबक सिखाने के लिए 10 दिन तक इस ऑपरेशन की खास रणनीति तैयार की गई। ऑपरेशन 72 घंटे के लिए तैयार किया गया था, जिसमें इंडियन फोर्स को 2 से 4 किलोमीटर दुश्मन की सरहद के भीतर जाकर हमला करना था।

इसके लिए  सेना के तेज तर्रार कमांडों की चार रेजिमेंटों को चुना गया। सभी जांबाजों को आम फोर्स के अपेक्षाकृत अत्याधुनिक हथियार दिए गए, ताकि ऑपरेशन पूरी तरह सफल हो और दुश्मन पूरी तरह नेस्तानाबूद हो। 72 घंटे के इस ऑपरेशन में जवानों का घंटों भूखा रहना भी ऑपरेशन का हिस्सा था, ताकि जवानों की अर्लटनेस बनी रहे। ऑपरेशन में फोर्स की डाइट और उनके खान-पान का तरीका क्या रहेगा, ये भी पहले से ही बेहद रोमांचक ढंग से तय कर दिया गया था। हर कमांडो के कंधों पर 25 किलो गोलाबारूद और 15 किलो अन्य सामान लदा था। दुश्मन को कैसे घेरकर मारना है और कैसे और कहां से वापस लौटना है, यह भी तय था।

इस दौरान यदि फोर्स दुश्मन के इलाके में घिरी, तो उनके लिए सोलिड कवर फायर भी तैयार था। इसी प्लान के बदौलत फौज के जांबाज भारतीय सेना के इतिहास में सबसे टफ सर्जिकल स्ट्राइक को बिना कैजुएलिटी के वापस लौटे थे।
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