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Chandigarh: बिना अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र चल रहे PU-PEC समेत कई कॉलेज-यूनिवर्सिटी, आग लगे तो खुद करें बचाव

Mon, 31 Jul 2023 02:05 PM IST
निवेदिता वर्मा प्रियंका ठाकुर, संवाद न्यूज, चंडीगढ़

सार

2020 में सेक्टर 32 के एक पीजी में हुए आग हादसे से प्रशासन ने कोई सीख नहीं ली है। पीजी में अग्नि सुरक्षा के मापक नहीं थे। शहर में पढ़ने के लिए आई तीन युवतियों के सपने उनके साथ आग में ही राख हो गए। चंडीगढ़ में हजारों की संख्या में विद्यार्थी कॉलेज, यूनिवर्सिटी के हॉस्टलों में रह रहे हैं।
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विस्तार
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चंडीगढ़ के कॉलेज और यूनिवर्सिटी बिना अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र के चल रहे हैं। यानी कभी आग लग जाए तो विद्यार्थी संस्थान से कोई उम्मीद न करे और खुद से बचाव की तरकीब सोच लें। दो कॉलेजों को छोड़कर चंडीगढ़ के कोई भी कॉलेज और यूनिवर्सिटी अग्नि सुरक्षा के मानकों पर खरा नहीं उतरता।

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अग्निशमन विभाग की ओर से संस्थान के आवेदन करने पर उनकी बिल्डिंग की जांच कर बिल्डिंग के आग से सुरक्षित होने पर अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। इसकी वैधता तीन साल तक रहती है। हैरानी की बात है कि चंडीगढ़ के नामी शैक्षणिक संस्थान बिना इन मापकों को पूरा किए चल रहे हैं। इसमें पीयू, पेक, चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर, गर्ल्स कॉलेज आदि सभी संस्थान शामिल हैं।  

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2020 में पीजी आग हादसे से हुई युवतियों की मौत से नहीं ली सीख
2020 में सेक्टर 32 के एक पीजी में हुए आग हादसे से प्रशासन ने कोई सीख नहीं ली है। पीजी में अग्नि सुरक्षा के मापक नहीं थे। शहर में पढ़ने के लिए आई तीन युवतियों के सपने उनके साथ आग में ही राख हो गए। चंडीगढ़ में हजारों की संख्या में विद्यार्थी कॉलेज, यूनिवर्सिटी के हॉस्टलों में रह रहे हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा के लिए अग्नि सुरक्षा के मानकों को पूरा क्यों नहीं किया जा रहा यह चिंता का विषय है। बिना अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र के यह संस्थान विद्यार्थियों की सुरक्षा का जिम्मा कैसे ले सकते हैं।

केवल इन दो कॉलेजों के पास है प्रमाण पत्र
सिर्फ दो कॉलेज अग्नि सुरक्षा के मानकों को पूरा करते हैं। इसमें सेक्टर 45 का देव समाज कॉलेज फॉर वुमन और सेक्टर 26 का श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज ऑफ फार्मेसी शामिल है।

यूजीसी के दिशा निर्देशों का नहीं हो रहा पालन
यूजीसी के विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर जारी किए दिशानिर्देशों को सिटी ब्यूटीफुल के शैक्षणिक संस्थान इत्मीनान से धज्जियां उड़ा रहे हैं। दिशा निर्देश के अनुसार अग्नि सुरक्षा के लिए हर सेमेस्टर में विद्यार्थियों की कम से कम एक मॉक ड्रिल करवाना जरूरी है। अमर उजाला ने विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ रहे विद्यार्थियों से जब मॉक ड्रिल के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। विद्यार्थियों को आग लगने के समय संस्थान के निकास मार्ग का भी कोई अंदाजा नहीं।

तीन सालों में अग्नि सुरक्षा को लेकर नहीं दी कोई जानकारी
मॉकड्रिल तो दूर कॉलेज ने तीन सालों में हमें अग्नि सुरक्षा को लेकर कोई जानकारी नहीं दी। बिल्डिंग में अलग से कोई निकास मार्ग नहीं बनाए गए हैं और न हमें कभी इसके बारे में बताया गया। ऑडिटोरियम में पिछले साल ही अग्निशामक यंत्र लगे हैं। -आमिश चौहान, डीएवी कॉलेज-10 विद्यार्थी

कॉलेज में अग्नि सुरक्षा मानक है पर कभी इसके बारे में गाइड नहीं किया

कॉलेज में अग्नि सुरक्षा के मानक हैं पर संस्थान में आग लगने की स्थिति में कैसे रिएक्ट करना है इस पर कभी हमें गाइड नहीं किया गया। मैंने कभी कॉलेज में अग्नि सुरक्षा को लेकर किसी मॉक ड्रिल का आयोजन नहीं देखा। - चिराग, जीजीडीएसडी कॉलेज-32 विद्यार्थी

कॉलेज में निकास मार्ग के साइन नहीं लगे

कॉलेज में निकास मार्ग के साइन नहीं लगे हैं और न इसके बारे में कभी कोई जानकारी दी गई। हालांकि अग्नि सुरक्षा को लेकर मॉकडि्रल हुए हैं जहां अग्निशामक यंत्र को इस्तेमाल करने के बारे में बताया गया है। - अभिजीत, पीजीजीसी-11 विद्यार्थी

उचित अग्नि सुरक्षा व्यवस्था न होने पर कॉलेज की होगी जवाबदेही

कॉलेज के प्राचार्य संस्थान में अग्नि सुरक्षा के पूरे मापक रखने के जिम्मेदार हैं। सभी कॉलेजों से उनके अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र की जानकारी ली जाएगी जिसके न होने पर उन्हें जवाबदेही देनी होगी। - अमनदीप भट्टी, उच्च शिक्षा निदेशक
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सभी कॉलेजों का करेंगे निरीक्षण
सभी कॉलेजों का अग्निशमन विभाग निरीक्षण करेगा और जिनके पास अग्नि सुरक्षा की उचित व्यवस्था नहीं है उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा। - गुरिंदर सिंह सोढ़ी, चीफ फायर ऑफिसर

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